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WHO के अधिकारियों ने पुष्टि की, कोरोना नहीं है एयरबोर्न डिजीज

WHO के अधिकारियों ने पुष्टि की, कोरोना नहीं है एयरबोर्न डिजीज

 

As we know there is no cure for coronavirus to date and our scientists and researchers are working day and night to get the cure. First of all, Alldatmatterz urge you to wash your hands regularly and take all precautions to stay away from the virus.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रीय निदेशक डॉ.पूनम खेत्रपाल सिंह के अनुसार, कोरोनावायरस का कोई भी अभी तक एयर बोर्न का मामला सामने नहीं आया है। कोरोना वायरस अत्यधिक संक्रामक है और सूत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, कोरोना वायरस ज्यादातर श्वसन की बूंदों और किसी के निकट संपर्क में आने से फैलता है। हाल ही में डॉ.पूनम खेत्रपाल सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

इसको संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,"कोरोनावायरस के एयरबोर्न से फैलने को अभी तक रिपोर्ट नहीं किया गया है। अब तक की प्राप्त जानकारी के आधार पर और हमारे अनुभव के आधार पर कोरोनावायरस कोविड -19 श्वसन की बूंदों के माध्यम से फैलता प्रतीत होता है। उदाहरण के लिए जब कोई बीमार व्यक्ति खांसता है और किसी के निकट संपर्क में आता हैं तो यह फैलता हैं। यही कारण है कि डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार, हाथ और मुँह की स्वच्छता बनाए रखने की सलाह देता है।”

एरोसोल का क्या रोल हैं - डब्ल्यूएचओ

चीनी अधिकारियों के अनुसार, सीमित स्थानों में एरोसोल की उच्च सांद्रता के संपर्क में आने से एरोसोल संचरण हो सकता है और इसमें अस्पतालों के आईसीयू और सीसीयू शामिल हैं। उन्होंने बताया कि एयरोसोल ट्रांसमिशन पर डेटा प्राप्त करने और इस मोड को समझने के लिए अधिक परीक्षण की आवश्यकता है। मान लीजिए किसी कोरोना संक्रमित इंसान को नेब्युलाइज़र दिया गया तो इस प्रक्रिया में एक फ़्यूम बनता है क्योंकि मरीज़ सांस लेता और छोड़ता रहता है। एरोज़ल, ड्रॉपलेट की तुलना में ज़्यादा हल्का होता है और हवा में ज्यादा देर तक टिक सकता है। ऐसे में कोरोना के एयरबॉर्न संक्रमण का ख़तरा उन्हीं अस्पताल के कर्माचारियों को होगा जो इलाज में ऐसे प्रक्रिया का इस्तेमाल करें जो एरोज़ल पैदा करती हो।

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस ने सोमवार को एक आभासी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को बताया कि दुनिया भर में कोरोनावायरस महामारी "तेजी" से फ़ैल रहा है। हालांकि, वायरस के "प्रक्षेपवक्र में परिवर्तन" लाना अभी भी संभव है। उनके अनुसार महामारी तेजी से फ़ैल रही है। पहले रिपोर्ट किए गए 1,00,000 मामलों को यहाँ तक पहुंचने में 67 दिन लगे लेकिन अगले 1,00,000 मामलें केवल अगले 11 दिन में रिपोर्ट किये गए और तीसरे 1,00,000 मामलों को सिर्फ चार दिन में रिपोर्ट किया गया।  हालाँकि उनके अनुसार, हम असहाय नहीं हैं। हम इस महामारी के प्रक्षेपवक्र को बदल सकते हैं।

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