Hollywood Coronavirus Bollywood Fashion Sports India Beauty Food Health Global Tales Facts Education & Jobs Cricket World Cup 2023 Science & Tech Others
मिल बैठे थे कुछ यार

मिल बैठे थे कुछ यार

manjile

आज मिल बैठे थे कुछ यार
यूँ तो मिलते थे हम रोज़
पर आज हवा मैं कुछ था
शायद फुर्सत की महक
या फिर शायद फुर्सत का एहसास
अब सच था या झूठ
जो कुछ भी था
मिल तो बैठे थे कुछ यार

कोई जंग जीत के आया था
और कोई बाज़ी हार के
किसी को लग रहा था
शायद मंज़िल मिल गयी
किसी का सपना अभी भी सपना था
और किसी को मंज़िल की छा में
चलते चलते जो
कांटे चुभ रहे थे
उनसे शिकायत थी
और किसी को
बाज़ दफवा इस बात का भरोसा चाहिये था
की मंज़िल उसे मिल जाएगी...

और जब मिल बैठे कुछ यार
तो इन सब तकरीरों को
एक आश्वाशन
एक तसली
एक तारीफ
एक उम्मीद
जिसे जिस भी चीज़ की तमना थी
उसे वह मिल गयी
क्या बात यह यारों की फुर्सत
और उस पे
मिल बैठना एक साथ
हर मसाला सुलझा सा लगाने लगा
हर सपना सच्चा सा लगाने लगा
हर चेहरे पे मुस्कुहरत बिखर गयी
हर उम्मीद पे फिर से बहार आ गयी
मंज़िलें कुछ आसान सी लगने लगी
सोया हुआ इश्क़ फिर जवान हो गया
खोये हुए दोस्ताने फिर करीब आ गया
ऐसा लगा
इन फुर्सत के पलों में
जब मिल बैठे यार
तब ये एहसास भी नक़ाब से निकल आया
ज़िन्दगी में पलों को ढूँढ़ते ढूँढ़ते
हर पल में कितनी
ज़िन्दगी खो बैठे थे हम.

आज फिर कुछ यार मिल बैठे
फुर्सत में
एक दूसरे की रूह को छू बैठे
कितना ख़ूबसूरत
कितना मासूम
कितना खुशनुमा सा था सब कुछ
और कितनी आसानी से
हर किसी के
जज़्बात
आईने की तरह
आर पार
नज़र आ रहे थे.

चलो अब चलें
अलविदा यारों
फिर मिल बैठेंगे
फुर्सत के पलों में
जब भी कोई जुंग जीतेगा
या फिर
कोई बाज़ी हार बैठेगा
मुस्कुहराठों और रुसवाईओं के बीच.

पर अलविदा के साथ
यह वादा रहा
फिर मिल बैठेंगे ज़रूर
फुर्सत के पलों में.

क्यूंकि यारों
दोस्ती
ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से
मिला देने की
एक खुशनुमा सी
दस्तक है
इसे कभी रुस्वा मत होने देना.

Comments

Trending