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चाणक्य की 10 महत्वपूर्ण बातें

चाणक्य की 10 महत्वपूर्ण बातें


महान विद्वान चाणक्य आचार्य चाणक्य के नाम से विख्यात थे और महान राजा चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाने में चाणक्य का हाथ था। चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र बिंदुसार मौर्य और उनके पुत्र अशोक को सम्राट  अशोक बनाने में  उन्होंने ही मार्ग दर्शन किया था। उन्हे उनकी कूट नीतियों के कारण  'कौटिल्य' के नाम से भी जाना जाता था। वो तक्षशिला विश्वविद्यालय में आचार्य के रूप में छात्रों को राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का ज्ञान देते थे। उन्होंने कई ग्रंथों की भी रचना की थी जिसमे से एक ग्रन्थ अर्थशास्त्र बहुत प्रसिद्ध हुआ था और वो आज उस समय में मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता था और ये आज भी प्रसिद्ध हैं।

आचार्य चाणक्य एक प्रचंड,संयमी,  स्वाभिमानी, तीक्ष्ण बुद्धि और पक्के इरादे वाले व्यक्ति थे। उनके जीवन का विचार था अगर व्यक्ति सादा जीवन व्यतीत करेगा तो उसका जीवन उच्च होगा। वो स्वयं भी सादा जीवन व्यतीत करते थे। चाणक्य नीतियों का उस समय में जितना उपयोग था उतना ही आज भी हैं। उनकी नीतियां इतनी अधिक प्रासंगिक थी कि आज भी उनका अनुसरण होता हैं। चाणक्य की नीतियों को ”चाणक्य नीति” नामक किताब में लिखा गया हैं। जब एक व्यक्ति अपना अच्छा और बुरा नहीं समझ पाता है तब यह नीतियां हमारा मार्गदर्शन करती है और जीवन में आने वाली परेशानियों का सामना करने में हमें सक्षम बनाती है। आचार्य चाणक्य की बताई गयी 10 वो महत्वपूर्ण बातें जो जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है और हमारा मार्गदर्शन कर सकती हैं -

  1. मुर्ख लोगो से कभी विवाद न करे - चाणक्य निति कहती है किसी मुर्ख के साथ विवाद करने वाला भी मुर्ख ही होता है इसलिए हमें कभी भी मुर्ख लोगो के साथ विवाद नहीं करना चाहिए। एक मुर्ख व्यक्ति के पास लोगो को समझने की समझदारी ना होने के कारण उनसे विवाद करने पर हमारा ही नुकसान होगा। ऐसे लोगो बहस होने पर किसी भी बेइज्जती करने से भी नहीं कतराते और हमें मानसिक तौर पर कमजोर करते है। मुर्ख लोगो के साथ विवाद करने से बचें और अपने विवेक का उपयोग करें।
  2. अपनी कमजोरी किसी को न बताये - हर व्यक्ति अपने सुख-दुःख बांटना चाहता है और इसी बीच कभी-कभी वो अपने चाहने वालों, दोस्तों या अपने नजदीकी रिश्तेदारों से अपने मन की बात कहते हुए अपनी कमजोरियां बता देता हैं। लेकिन चाणक्य नीति कहती है कि हमें अपनी कमज़ोरी किसी के साथ नहीं शेयर करनी चाहिए। जब हम अपनी कमजोरी किसी के साथ शेयर करते है तो यह सम्भवना रहती है कि वो हमारी कमज़ोरी को किसी अन्य को बता दें। ऐसे में यह कमज़ोरी हमें बतानी महंगी पड़ सकती हैं। ये हमारे निजी जीवन को सबके सामने उजागर कर देती हैं। 
  1. एक अवगुण सभी गुणों को नाश कर देता है - हर व्यक्ति का जीवन गुण और अवगुण से बना होता हैं। ऐसा होना संभव नहीं कि व्यक्ति गुणों से भी भरा हो या उसमें अवगुण ही हों। लेकिन चाणक्य नीति कहती है कि एक व्यक्ति के जीवन में एक अवगुण बाकी सभी अवगुणो को नाश कर देता हैं। आप चाहे कितने भी गुणवान क्यों ना हों लेकिन एक अवगुण आपके सभी गुणों पर पानी फेर देता है । आपकी एक ऐसी गलती जो सही नहीं हैं, वो आपका जीवन नष्ट कर देती हैं। जीवन नरक बन जाता है। अवगुणो में कुछ ऐसे दोष आते है जो समाज में एक बुराई माने जाते है जैसे नशा करना, शराब पीना, नशेबाजी करना, अय्याशी करना, जुआ खेलना आदि। 
  1. धन की बचत कर धन को सोच – समझ कर खर्च करे - धन ही जीवन है और धन संपत्ति हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग होता है जो समाज में हमें सम्मान दिलाता है, हमें जीवन में सभी जरूरतों को पूरा करता हैं। अगर आपके पास धन नहीं है तो आप खुश नहीं रह सकते है क्योंकि धन से ही इज्जत और सुख – समृद्धि मिलती हैं। हमें जीवन में धन की कदर करनी चाहिए। म्हणत से कमाए धन को फालतू में व्यय करने से हमें दुखों का सामना करना पड़ सकता हैं। चाणक्य नीति के अनुसार, धन का जरूरत से अधिक व्यय करने से बचना चाहिए और सोच समझकर खर्च करना चाहिए। 
  1. बदनामी का डर जरूरी होता हैं - आचार्य चाणक्य नीति के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को अपनी इज़्ज़त की परवाह नहीं है तो वो सही व्यक्ति नहीं हैं। हर व्यक्ति को बदनामी और बेइज़्ज़त होने का डर होना चाहिए। जिस व्यक्ति के अंदर यह डर होता है तो वो अच्छे काम करना चाहते हैं और बुरे काम करने से डरता हैं। चाणक्य के अनुसार, बदनामी से हमें जीवन भर का दुःख मिलता हैं। इसलिए बदनामी का डर व्यक्ति को बुरे काम करने से रोकता है। बुरे और अच्छे की परिभाषा हर वयक्ति की अलग होती हैं लेकिन ऐसे समय में हमें अपनी अंतर आत्मा की आवाज़ सुननी चाहिए। 
  1. आलस्य का त्याग करें - एक शोध के अनुसार, संसार में केवल 20% सफलता पाते है और 80% लोग असफल हो जाते हैं। क्या आपने सोचा है इसका की कारण होता हैं। इस 80 %क्यों नहीं होते ? अब आप कहोगे की इन्हें अच्छी परवरिश मिली होगी या इनके बाप – दादा अच्छे घर से होंगे. नहीं गलत, आज ऐसे कई Example है जहाँलोगों की असफलता के पीछे कारण होता है आलस।  चाणक्य नीति कहती हैं - हमारे जीवन में हमारा सबसे बड़ा दुश्मन हमारा आलस्य होता हैं जो हमें सफलता की और अग्रसर होने से रोकता हैं। अगर हम आलस का त्याग करके आगे बढ़ेंगे तो हमें सफलता मिलेगी। 
  1. जो व्यक्ति आपकी बात सुनने में रूचि ना दिखाए उस पर विश्वास न करे - चाणक्य नीति कहती है अगर कोई व्यक्ति आपकी बात सुनने में रूचि नहीं दिखा रहा है तो इसका मतलब वो आपका हितेषी नहीं है और वो आपको भविष्य में धोखा दे सकता है । इसलिए कभी भी ऐसे किसी व्यक्ति पर विश्वास ना करें। अगर कोई व्यक्ति आपकी महत्वपूर्ण बात सुनने के बदले आपको अनदेखा करता है तो वो आपका अपना नहीं है और वो आपके विश्वास के लायक भी नहीं हैं। साथ ही ऐसे किसी भी व्यक्ति से अपनी मन की बातें और अपनी निजी बातें शेयर ना करें अन्यथा वो आपकी बातें किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर करके आपको नुक्सान पंहुचा सकता है और आपका विश्वास तोड़ सकता हैं।
  1. अपने बराबरी के लोगों के साथ दोस्ती करें - अपने से कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के लोगो से दोस्ती करने से आपको हीं हानि  हो सकती है और आप कभी खुश नहीं रह सकते। चाणक्य निति के अनुसार, अपने से कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के लोगों से मित्रता करने से हमें जीवन में दुःख मिलता हैं।अगर हम किसी ऐसे को अपना मित्र बनाएंगे जो हमसे कम प्रतिष्ठित हो तो वो हमेशा मदद की उम्मीद रखेगा और अगर हम अपने से अधिक प्रतिष्ठित व्यक्ति से दोस्ती करेंगे तो हम हमेशा हीं भावना से ग्रस्त होकर तुलना करेंगे।  
  1. वर्तमान में जीवन जीना चाहिए, भविष्य की चिंता नहीं नहीं करनी चाहिए - आचार्य चाणक्य नीति के अनुसार, हमें अपने भविष्य की चिंता ना करके वर्तमान में जीवन जीना चाहिए। हमें लाभ भी अपने भूतकाल मे हुई बातों के बारें में विचार करके व अपने भविष्य के बारें में सोचकर अपना वर्तमान खराब नहीं करना चाहिए। हमारे जीवन का आने वाला कल है या बिता हुआ कल हमें दुःख और चिंता देता हैं और हमारे वर्तमान को भी खराब करता हैं। हमें वर्तमान में जीना चाहिए।
  2. लोगों से भावात्मक रूप से नहीं जुड़ना चाहिए - चाणक्य नीति कहती है जीवन में खुश रहने के लिए किसी के साथ भावात्मक रूप से जुड़ने की जरुरत नहीं हैं अन्यथा हमें दुःख और दर्द के आलावा कुछ नहीं मिलेगा। हमारे जीवन में दुःख हमारे अपने कारण ना होकर हमारे परिवार के लोगों, रिश्तेदारों के कारण अधिक होता है। हमारे जीवन में रिश्तो के कारण हमें दुख मिलता है और अगर हम अपने रिश्तो के साथ अत्यधिक जुड़ा जाते है तो हमें भय और चिंता हर वक़्त घेरे रहती हैं। 

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