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आनंद कुमार : जिसका सपना है गरीबों के सपने पूरा करना

आज के इस दौर में जब इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए कुकुरमुत्ता की तरह अंधाधुंध उगने वाले कोचिंग संस्थान अपनी नैतिकता बेंचकर बड़ी बेशर्मी से लाखों रूपये वसूलने में भी संकोच नहीं करते हैं और न ही अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश पाने की कोई गारंटी देते हैं, इसी दौर में तथाकथित सर्वाधिक पिछड़े राज्यों में से एक बिहार के एक अति गरीब परिवार का बेटा पापड़ बेचकर भी देशभर से आए आर्थिक रूप से कमज़ोर बच्चों को देश के सबसे प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में दाखिला दिलाने की न सिर्फ शपथ लेता है बल्कि 100 प्रतिशत बच्चों को आईआईटी भेजने में सफल भी होता है। 

anand kumar

यह प्रेरणादायक कहानी है गणित के शिक्षक और विद्वान आनंद कुमार की जिन्होंने जीवन की कठिनाइयों से लड़ते हुए आईआईटी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए 'सुपर 30' नामक संस्थान की स्थापना की जिसकी चर्चा अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में होती है और 'सुपर 30' और आनंद कुमार आज युवाओं के लिए एक मिसाल हैं। 

पटना में एक डाक विभाग के क्लर्क के घर जन्मे आनंद की गणित में रूचि ने उन्हें जुनूनी बना दिया और सरकारी स्कूल में पढ़ने के बावजूद भी स्नातक के दौरान 'नंबर थ्योरी' पर उनका शोध पत्र मैथेमेटिकल स्पेक्ट्रम और मैथेमेटिकल गैजेट में छापा गया। पिता की अचानक मृत्यु की पीड़ा और आर्थिक निर्बलता ने उनसे चयन हो जाने के बाद भी कैंब्रिज विश्वविद्यालय जाने का अवसर छीन लिया लेकिन गणित की पढाई इन्होने जारी रखी। दिन में गणित की पढाई और शाम को आजीविका चलने के लिए घर पर ही माँ द्वारा बनाए गए पापड़ आनंद कुमार साईकिल पर बेंचने के लिए शहर में निकलते थे।  उन्होंने ट्यूशन पढ़ाया और सप्ताहांत में बनारस जाते थे ताकि बीएचयू के केंद्रीय पुस्तकालय में गणित के जर्नल पढ़ सकें क्योंकि पटना में विदेशी जर्नल उपलब्ध नहीं थे।  

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1992 में आनंद ने 500 रूपये में किराये पर कमरा लेकर गणित पढ़ाना शुरू किया और 'रामानुजन स्कूल ऑफ़ मैथमेटिक्स' (RSM) की स्थापना की। धीरे-धीरे इस संस्थान की प्रसिद्धि बढ़ती गई और हज़ारों छात्र जुड़ते गए। वर्ष 2000 एक गरीब छात्र के एक सवाल ने आनंद कुमार को उनका अतीत याद दिला दिया जिसमे उसने आनंद से कहा की क्या गरीबों को देश के बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने का हक़ नहीं है और यहीं से 'सुपर 30' के सफर की शुरुआत हो गई। वर्ष 2002 में आनंद कुमार ने गरीब बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए 'सुपर 30' की स्थापना की और तभी से 'रामानुजन स्कूल ऑफ़ मैथमेटिक्स' हर साल एक परीक्षा का आयोजन करता है और 30 प्रतिभाशाली छात्रों का चयन करता है। इन 30 छात्रों के लिए रहना, खाना, पढाई और किताबें निःशुल्क होती हैं। आनंद की माँ जयंती देवी सभी छात्रों के लिए खाना बनती हैं और उनके भाई प्रणव प्रबंधन का काम देखते हैं। 2003 से 2017 के बीच में कुल 450 छात्रों में से 391 का चयन आईआईटी में हो चूका है जो अपने आप में एक कीर्तिमान है। आपको बताते चलें की आनंद के ऊपर तीन बार जानलेवा हमले हुए जिसके बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा दी गई। यह हमले प्रतिद्वंदी कोचिंग संस्थाओं द्वारा उनपर 'सुपर 30' बंद करने के लिए दबाव डालने के लिए कराए गए थे। आनंद 'सुपर 30' को चलने के लिए कोई सरकारी या निजी मदद नहीं लेते हैं और वह इसका संचालन अपनी संस्था RSM से होने वाली कमाई से ही करते हैं। 

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मार्च 2009 में प्रतिष्ठित डिस्कवरी चैनल ने 'सुपर 30' के ऊपर एक घंटे का प्रोग्राम दिखाया और न्यूयार्क टाइम्स द्वारा आधे पन्ने की खबर इनके ऊपर छापी गई जिसके बाद 'सुपर 30' की ख्याति बढ़ती गई। मिस जापान नोरिका ने पटना आकर आनंद पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है। टाइम मैगज़ीन ने 'सुपर 30' को 'बेस्ट ऑफ़ एशिया' की सूची में रखा था वहीँ गरीबों को मुफ्त शिक्षा देने के प्रयासों के लिए आनंद का नाम 'लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स' में दर्ज है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष दूत राशिद हुसैन ने 'सुपर 30' की प्रशंसा करते हुए इसे देश का सर्वश्रेष्ठ संस्थान कहा था। आनंद कुमार को श्रीनिवास रामानुजन पुरस्कार और मौलाना अबुल कलम आज़ाद शिक्षा पुरस्कार जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका है। विश्वभर के विश्वविद्यालयों में उन्हें एक गणित के विद्वान, शिक्षाविद और एक 'चेंज मेकर' के रूप में बुलाया जाता है। इसी साल आनंद कुमार के जीवन पर आधारित फिल्म रिलीज़ होगी 'सुपर 30' जिसमे मशहूर अभिनेता ह्रितिक रौशन आनंद का किरदार निभाएंगे। 

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