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जानिए चरण स्पर्श का धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व !

जानिए चरण स्पर्श का धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व !

भारत संस्कार प्रधान देश है, यहाँ अपने गुरुओं तथा बुजुर्गो के चरण स्पर्श करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है । चरण स्पर्श करने का धार्मिक तथा वैज्ञानिक महत्व है, जब भी हम किसी के चरण स्पर्श करते है हो वह हमे आशीर्वाद प्रदान करता है । यह बड़ो के प्रति आदर तथा विनम्रता दर्शाता है, बच्चो को बचपन में ही ये संस्कार दिया जाता है ।

बड़ों के चरण स्पर्श करने से हमे आशीर्वाद तो मिलता ही है साथ में उनमे विद्यमान गुण भी हमारे अंदर प्रवेश करते है । यह व्यक्ति के अहंकार को समाप्त करता है, यदि विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार चरण स्पर्श करने से हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है क्योंकि यह ऊर्जा पैर के अंगूठे व हाथों के पैरों में विद्यमान रहती है इसीलिए बाए पैर को बाए हाथ से तथा दाए पैर को दाए हाथ से स्पर्श किया जाता है ।

बड़ों के चरण स्पर्श करने से आयु, विद्या तथा मान - सम्मान में वृद्धि होती है, व्यक्ति का बल बढ़ता है, मन शांत रहता है । यदि कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर चरण स्पर्श करता है तो वह अपने लक्ष्य प्राप्ति में शक्ति प्राप्त करता है तथा उसका मनोबल बढ़ता है ।

शारीरक दृष्टि से देखा जाए तो जब हम किसी के चरण स्पर्श करते है तो हमारी रीढ़ की हड्डी का व्यायाम हो जाता है, सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है तथा शरीर लचीला हो जाता है । हम जिस व्यक्ति के चरण स्पर्श करते है वह हमे सकारात्मक ऊर्जा देता है, चरण स्पर्श करने से मन निर्मल होता है, पुण्य में बढ़ोतरी होती है, बुद्धि, विद्या, यश व आयु बढ़ती है ।

यदि हम चाहते है की हमारे बच्चे संस्कारित रहे तो हमे इस प्रथा को जीवित रखना होगा क्योंकि संस्कारी बच्चे ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण करने में सहायक होते है ।

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