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प्रणब मुखर्जी अब तक के सबसे कम विवादों में रहने वाले राष्ट्रपति रहे है | प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के शीर्ष और विरोधियो के द्वारा भी सराहनीय नेता रहे है | प्रणब मुखर्जी इंदिरा गांधी के विश्वास पात्र लोगो में से एक रहे है | उन्होंने राज्य सभा के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी है | राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का २४ जुलाई को कार्यकाल समाप्त हो गया | २५ जुलाई को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाएगी |

प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री का पद छोड़कर लगभग सभी पदों को सुशोभित किया | प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री बनने के लिए राजीव गांधी के कार्यकाल में अपनी अलग पार्टी बनाई किन्तु बाद में सुलह कर कांग्रेस पार्टी में वापसी की | सोनिया गांधी को २ बार चुनाव जितने में भी अपना अहम योगदान दिया | २०१२ में अपने विरोधी पी .ए.संगमा को हराकर उन्होंने राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया |

राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान उन्होंने बड़ी  आक्रामकता  से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया | उन्होंने पक्ष विपक्ष से ऊपर उठकर सभी निर्णय दिए और अच्छे कामो पर सरकार  की तारीफ भी की | प्रधानमंत्री मोदी जी ने प्रणब मुखर्जी की फेयरवेल पार्टी भी रखी ,ये पार्टी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति के सहज संबंधो की व्याख्या स्वयं ही कर देती है |

प्रणब मुखर्जी की पृष्ठभूमि कोलकाता है और यही से उन्होंने अपनी स्नाकोत्तर की डिग्री प्राप्त की | वे राजनीतिशात्र और इतिहास में स्नातक होने के साथ साथ कानून के भी जानकार है | वे अपनी जड़ो से सदैव जुड़े रहे | अपने पारम्परिक त्यौहार दुर्गापूजा को वे अपने पैतृक गाँव मिरति में मनाते है | उन्होंने पद्मभूषण के साथ साथ कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किये | उन्होंने कई किताबे लिखी |

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अजमल कसाब और अफजल गुरु जैसे देश द्रोहियो की दया याचिकाएं ख़ारिज कर दी|

 

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