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उदित होता नया पर्यटनस्थल उड़ीसा

उदित होता नया पर्यटनस्थल उड़ीसा

अगर पुराने बीचेस को घूम कर आप बोर गए है तो आपको उड़ीसा स्थित चांदीपुर बीच अवश्य ही घूमने जाना चाहिए ,आप गोवा ,मुंबई तो घूम ही  चुके होंगे ,बारिश के इस मौसम में घूमने का मन है पर पुरानी जगह जाना नहीं चाहते तो आप उड़ीसा के बीच स्थल चांदीपुर जा सकते है यहां आपको अवश्य ही नए और खूबसूरत अहसास रोमांचित कर देंगे |उड़ीसा एक फुल पैकेज पर्यटन स्थल है ,यहां आपको आध्यात्मिक शांति भी मिलेगी और प्राकृतिक सौंदर्य भी जिससे आप घूमने का पूरा आनंद उठा पाएंगे आइये जानते है क्या है आप के लिए उड़ीसा में -

  • जगन्नाथ मंदिर - आपको घूमने की शुरूआत पूरी के जगन्नाथ मंदिर से ही करनी चाहिए | इस मंदिर को देखने के लिए देश -विदेश से लाखो पर्यटक प्रतिदिन यहां आते है ,यह हिन्दू आस्था का प्रतीक है और कला का अद्भुत एवं अद्वितीय उदाहरण भी |
  • कोणार्क मंदिर - उड़ीसा का कोणार्क मंदिर विशेष रूप से भगवान सूर्य को समर्पित है ,इस मंदिर की अनेक अद्भुत बाते आकर्षण का केंद्र है ,जैसे कहते है की यहां सूर्य की पहली और अंतिम किरण भगवान सूर्य की मूर्ति पर ही पड़ती है और ऐसे अनेक अद्भुत एवं विस्मयकारी बातें इस मंदिर के विषय में प्रचलित है |
  • लोकनाथ मंदिर - यह एक शिव मंदिर है ,जो शिव भक्तो का प्रिय स्थल है |
  • अर्द्धशनि मंदिर - पूरी से तीन किलोमीटर की दुरी पर स्थित यह मंदिर पूर्णतः सफेद है ,और आकर्षण का मुख्य केंद्र है |

इसके आलावा गुंडिचा घर मंदिर ,दरिया हनुमान एवं गौरांग मंदिर भी आकर्षण का मुख्य केंद्र है |

  • चिलका झील - चिलका झील आपको आनंदित कर देगी ,यह झील पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है | यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है ,यह सम्पूर्ण भारत में सबसे बड़ी खारे पानी की झील है |यह पूरी के दक्षिण पश्चिम में स्थित है | यह झील 70 किलोमीटर लम्बी एवं 15 किलोमीटर चौड़ी है |यहां जाड़ों में साइबेरिया के प्रवासी पक्षी देखे जा सकते है |
  • महेन्द्रगिरि - महेंद्रगिरि एक पर्वत श्रृंखला है ,जिसकी सुंदरता और शांत वातावरण पर्यटकों का मन स्वयं ही अपनी ओर खींच लेता है | आप यहां प्रकति का भरपूर आनंद ले सकते है | यह एक प्राचीन स्थल है इस कारण यहां कई प्राचीन अवशेष आज भी सुरक्षित है |

  • खंडगिरि  गुफा - भुवनेश्वर से ६ किलोमीर दूर स्थित यह गुफाये धार्मिक इतिहास को दर्शाती है | इन गुफाओ में जैन विद्वानों और तपस्विओं का इतिहास दर्ज है | पहाड़ो की चट्टानों को काटकर बनाई  गई ये गुफाये अवश्य ही आपको आकर्षित और आनंदित कर देंगी |
  • उदयगिरि की गुफाये - इनकी कुल संख्या 18 है |135  फ़ीट की उचाई पर ये गुफाये स्थित है |इन गुफाओ में मनुष्यो और जानवरो की पेंटिंग की गयी है |  यह गुफाये जैन तपस्वियों के रहने के लिए बनाई गयी थी | इन दीवारों पर जैन धर्म ग्रंथो के साहित्यो को दर्शाया गया है | 
  • चांदीपुर बीच - यह बीच बालेश्वर जिले में स्थित है |यहां प्रसिद्ध मिसाइल लांच पैड भी है | यहां नीलगिरि की पहाड़िया भी स्थित है | चांदीपुर अपने सीफूड के लिए भी जाना जाता है | झींगा मछली यहां का मुख्य सीफूड है | 

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