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विश्व गरीबी दिवस  - 17 अक्टूबर world poverty day

हमारा समाज कितना ही विकास की ओर अग्रसर हो जाए लेकिन समाज से गरीबी कभी ख़त्म नहीं हो सकती। दुनिया में इतने अधिक आर्थिक विकास, तकनीकी साधनों और वित्तीय संसाधनों के होते हुए भी अभी भी ऐसे बहुत सी जनसंख्या है जो गरीबी रेखा के नीचे है और गरीबी में अपन| जीवन व्यतीत करते हैं। 

विश्व गरीबी दिवस (World poverty day) एक ऐसा दिवस है जिससे दुनिया गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाती हैं। हर साल यह दिवस 17 अक्टूबर को मनाया जाता हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे का उदेशय वैश्विक गरीबी को समाप्त करने जागरूकता को बढ़ाना हैं। सबसे पहले इस दिवस को मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 1993 में पहल की थी। उसके बाद से हर साल 17 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता है।विश्व गरीबी दिवस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसम्बर, 1992 को प्रस्ताव पारित किया था और इसका मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों में गरीबी को खत्म करना है। 


फ्रांस ने सबसे पहले मनाया था विश्व गरीबी दिवस (World poverty day) 

विश्व गरीबी दिवस पहली बार 17 अक्टूबर 1987 में फ्रांस में मनाया गया था जिसमें लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया था। अत्यधिक गरीबी को दूर करने, हिंसा और भुखमरी के शिकार लोगों को सम्मानित करने के लिए फ्रांस, पेरिस के तरकाडेरो (Trocadéro) में एक लाख लोगों एकत्र हुए थे। उसके बाद से दुनिया भर में यह दिवस मनाया जाने लगा। 

दिसंबर 1992 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आधिकारिक तौर पर गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (22 दिसंबर 1992 का 47/196 संकल्प) के लिए 17 अक्टूबर तारीख की घोषित की।फिर दिसंबर 1995 में, कोपेनहेगन सोशल समिट के बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गरीबी उन्मूलन (1997-2006) के लिए संयुक्त राष्ट्र के पहले दशक की घोषणा की।

भारत में गरीबी-दर

अगर हम आंकड़ों की बात करें तो केंद्र सरकार के अनुसार, 2012 में भारत की जनसंख्या की लगभग 2119% आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है। विश्व बैंक की वर्ष 2011 रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की 236 प्रतिशत जनसंख्या (लगभग 276 मिलियन) की प्रतिदिन क्रय शक्ति 1125  डॉलर प्रतिदिन है। अंतरराष्ट्रीय भुखमरी सूचकांक 2016 के अनुसार, भारत को 97वां स्थान मिला है। इसमें विकासशील देशों के लिए औसत दर 2113  रखी गयी थी जबकि भारत की यह दर 2815 % थी। कृषि प्रधान देश भारत में गरीबी का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, कमजोर कृषि, भ्रष्टाचार, रूढ़िवादी सोच, जातिवाद, अमीर गरीब में ऊँच-नीच, नौकरी की कमी, अशिक्षा, बीमारी इत्यादि है। खराब कृषि और बेरोज़गारी के कारण से लोगों को भोजन की कमी से जूझना पड़ता है। यही वजह है कि महँगाई ने भी पंख फैला रखे हैं। वहीं भारत में गरीबी का एक प्रमुख कारण बढ़ती जनसंख्या भी है।


संयुक्त राष्ट्र ने विकास लक्ष्य में शामिल किया गरीबी की पहचान

संयुक्त राष्ट्र ने 2000 में सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (MDG) को अपनाते हुए लोगो की परेशानियों के लिए आठ कर्क ज़िम्मेवार बताएं। इसमें शामिल हैं - गरीबी और भूख, शिक्षा में असमानता, लिंग असमानता, बाल मृत्यु दर, गरीब मातृ स्वास्थ्य, संक्रामक रोग, बदलते प्रवेश, और सतत विकास शामिल है।

# एन्ड पावर्टी डे #EndPovertyDay 

विश्व गरीबी दिवस के उप-लक्ष्य में इस बार अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस 2019 का थीम # एन्ड पावर्टी डे  रखी गयी है जिसको लोग सोशल मीडिया का सहारा लेकर जागरूकता फैला रहे हैं। #EndPovertyDay का प्रयास  गरीबी को दूर करने की लड़ाई हैं। आज के दिन लोग गरीबी को मिटाने के लिए जागरूकता लाने के लिए कई एंटी गरीबी कार्यक्रमों में शामिल होकर गरीबी के उन्मूलन पर काम करते  हैं। 17 अक्टूबर को न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले स्मारक कार्यक्रम के अलावा, अंतर्राष्ट्रीय दिवस के स्मरणोत्सव दुनिया भर में आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न गैर-सरकारी संगठन और सामुदायिक चैरिटी गरीबी उन्मूलन के लिए देश के नेताओं और सरकारों को सक्रिय रूप से गरीबी के खिलाफ लड़ाई को विदेश नीति का एक केंद्रीय हिस्सा बनाने के लिए इस दिवस का समर्थन करते हैं। अन्य गतिविधियों में "कॉल टू एक्शन" याचिकाओं पर हस्ताक्षर करना, संगीत कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना और अंतर-जातीय सभाओं को शामिल करना होता है।

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