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आज है वर्ल्ड ओजोन डे, जानें इस दिन के बारे में ये अहम बातें 

देशभर में कई ऐसे दिवस मनाएं जाते हैं जो कि पर्यावरण की सुरक्षा और देश की साफ-सफाई पर खास ध्यान देते नजर आते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही दिवस के बारे में बता रहे हैं जिसे वर्ल्ड ओजोन डे या अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस के तौर पर मनाया जाता है। हर साल 16 सितंबर को ये दिन मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य कारण ओजोन परत का संरक्षण करना है। 

क्यों मनाते हैं वर्ल्ड ओजोन डे- 

ये तो आप जानते ही होंगे ओजोन परत धरती को सूर्य की किरणों से निकलने वाले हानिकारक अल्ट्रा वाइलट किरणों से बचाने का काम करती है। इसी ओजोन परत को सुरक्षित करने और लोगों को इसके बारे में जागरूक करने के लिए ये दिवस मनाया जाता है। 

क्या है ओजोन परत- 

ओजोन परत को ओजोन लेयर के नाम से भी जाना जाता है। ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल पर अणुओं की ऐसी परत है जो कि 20 से 40 किलोमीटर के बीच के वायुमंडल में पाई जाती है। ओजोन परत धरती की सूरज से आने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षा करती है। ऐसा माना जाता है कि ओजोन परत के बिना जीवन संकट में पड़ सकता है। 

कैसे हुई ओजोन परत की खोज-
ओजोन परत की सबसे पहले खोज 1913 में की गई। इसका श्रेय फ्रांस के भौतिकविदों फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन को जाता है। उन्होंने ओजोन लेयर की खोज कर दुनिया को इससे रूबरू करवाया। भौतिकविदों फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने ही दुनिया के सामने खोज कर ये बताया कि ओजोन (O3) आक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली एक गैस है जो वायुमण्डल में बहुत कम मत्रा 0.02% में पाई जाती हैं। ये एक मोटी परत के समान है जो कि पृथ्वी से लगभग 30 से 40 किमी की ऊंचाई पर स्थित है। ओजोन गैस का 91% हिस्सा ही एकसाथ मिलकर ओजोन की परत का निर्माण करता है। शुरूआत में ये परत बहुत मोटी थी जो कि धरती को सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों से बचा रही थी लेकिन अब ये परत धीरे-धीरे पतली होती जा रही है।  


ओजोन परत ना होने से नुकसान-
ओजोन परत ना होने पर अल्ट्रा वाइलट किरणें अगर सीधा धरती पर पहुंच जाएं तो ये ना सिर्फ इंसानों के लिए बल्कि पेड़-पौधों और जानवरों के लिए भी बेहद खतरनाक हो सकती है। ऐसे में ये और जरूरी हो जाता है कि ओजोन परत की सुरक्षा की जाए। दुनियाभर में विकास और उन्नति के चलते पर्यावरण को खूब नुकसान हो रहा है। नतीजन, पेड़ काटे जा रहे हैं, प्रदूषण बढ़ रहा है। पर्यावरण की हानि के कारण ही ओजोन परत में छिद्र हो गया है जो कि दिनों-दिन बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, मनुष्य द्वारा बनाए जा रहे खतरनाक कैमिकल्स और टेक्नोलॉजी का भी ओजोन परत को खूब नुकसान हो रहा है। इन सभी कारकों के कारण ओजोन की परत धीरे-धीरे पतली हो रही है। यही कारण है कि जलवायु में भंयकर परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। प्राकृतिक आपदाएं बढ़ने का कारण भी ये ओजोन परत का पतला होना है। ऐसे में ओजोन परत के लिए लोगों को जागरूक करना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।   


क्या है वर्ल्ड ओजोन डे की थीम -

हर साल अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस (World Ozone Day) की एक थीम होती है। इस बार भी ओजोन परत के संरक्षण के लिए एक थीम रखी गई है जिसे '32 years and Healing' का नाम दिया गया है। 

कब से हुई वर्ल्ड ओजोन डे की शुरूआत -  

1913 में जहां ओजोन परत की खोज हुई। वहीं साल 1985 तक आते-आते वैज्ञानिकों ने ये खोजा कि पर्यावरण में प्रदूषण और अन्‍य दूषित तत्वों के कारण ओजोन परत में छिद्र होने लगा है। ओजोन परत में छिद्र को सबसे पहले ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों ने खोजा। उन्होंने अपनी खोज में पाया कि अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में एक बड़ा छिद्र हो गया है। इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों ने इस छिद्र का कारण भी पता लगाया। ओजोन में छेद का कारण वक्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC) गैस थी। इस खोज के बाद दुनियाभर के देशों ने आपसी सहमति से इस गैस के उपयोग पर रोक लगा दी। 16 सितंबर 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किया गया था जिसके बाद से ओजोन परत के संरक्षण के लिए ओजोन वर्ल्ड डे मनाया गया। इस दिवस की शुरूआत के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 1994 में 16 सितंबर की तारीख को  'अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस' मनाने का ऐलान किया। 

दुनियाभर में सबसे पहले वर्ल्ड ओजोन डे 1995 में मनाया गया था। आज दुनियाभर में 25वां वर्ल्डस ओजोन दिवस मनाया जा रहा है। इस दिवस के मौके पर बच्चों को स्कूलों में इस बारे में जागरूक किया जा रहा है साथ ही जगह-जगह इसके लिए कैंपेन भी चल रहे हैं ताकि लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करके ओजोन परत को सुरक्षि‍त किया जा सके।

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