Bollywood Fashion Sports India Beauty Food Health Global Tales Facts Others Education & Jobs Cricket World Cup 2019 Scinece & Tech

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2): लैंडर 'विक्रम' के चाँद पर पहुंचने का दुनिया को इंतज़ार

इसरो के वैज्ञानिकों के साथ सवा अरब भारतीयों के सपनों के सच करने वाला वो क्षण आने वाला है जब चंद्रयान-2 का लैंडर 'विक्रम' चाँद पर लैंड करेगा। 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-2 के निकलने के करीब डेढ़ महीने बाद यह दिन आया यही जब सबकी नजरें विक्रम लैंडर पर टिकी हुई हैं। चंद्रयान-2 को इसरो के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क 3 की मदद से लॉन्च किया गया था और अब विक्रम के लैंडिंग से पहले के सभी अहम पड़ाव पार हो चुके हैं। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख अध्यक्ष के. सिवन के अनुसार, चंद्रयान-2 अभियान का सबसे मुश्किल पल आने वाला है। यह पल इसलिए भी जटिल है, क्योंकि इसरो ने अब तक अंतरिक्ष में सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कराई है। चांद के सफर पर निकले चंद्रयान-2 का लैंडर 'विक्रम' का अब इतिहास रचने का समय है। चांद की सतह पर पहुंचने वाला  अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश बनेगा और चंद्रयान-2 दुनिया का पहला ऐसा यान है, जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। हालाँकि कुछ देश जैसे अमेरिका और सोवियत संघ रूस चांद को छूने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन सभी असफल रहे। अब तक चंद्रमा पर दुनिया के सिर्फ 6 देशों या एजेंसियों ने सैटेलाइट यान भेजे हैं। कामयाबी सिर्फ 5 को मिली। अभी तक ऐसे 38 प्रयास किए गए, जिनमें से 52% सफल रहे। 


पीएम मोदी (PM Modi) लाइव

इसरो द्वारा लॉन्च चंद्रयान-2 Chandrayaan-2) के लैंडर ‘विक्रम’ की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ को देखने के लिए में पीएम मोदी (PM Modi)  उपस्थित रहेंगे। सूत्रों के अनुसार, लैंडर विक्रम के ऐतिहासिक पल को देखने और इस घटना का गवाह बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेंगलुरु में इसरो के मुख्यालय में उपस्थित होकर इसको  लाइव देखेंगे। नहीं, पीएम मोदी ने स्पेस क्विज जीतने वाले देशभर के 70 बच्चों और उनके माता-पिता को भी इसरो में इस पल को देखने के लिए आमंत्रित किया है। अगर हम इसमें सफल होते हो तो यह भारत के लिए गौरव की बात होगा क्योंकि रूस, अमेरिका और चीन के बाद ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा तथा चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा।


चंद्रयान-2 के महत्वपूर्ण पड़ाव 

  • 22 जुलाई को चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च किया गया था। 
  • चंद्रयान-2 के मामले में 23 दिन पृथ्वी के चक्कर लगाने के बाद इसे चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने में 6 दिन लगे। 
  • दो सितंबर को यान के ऑर्बिटर से लैंडर को अलग किया गया था। 
  • तीन और चार सितंबर को इसकी कक्षा को कम (डी-ऑर्बिटिंग) करते हुए इसे चांद के नजदीक पहुंचाया गया। 
  • चांद की सतह पर शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि एक बजे से दो बजे के बीच विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग की जाएगी। 
  • चांद की सतह पर लैंडर ‘विक्रम’ को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। 
  • 21 घंटे तक विक्रम लैंडर अपने ऑर्बिटर के पीछे-पीछे 2 किमी प्रति सेकंड की गति से चांद का चक्कर लगाता रहेगा।

  • विक्रम में से रोवर प्रज्ञान सुबह 5.30 से 6.30 के बीच बाहर आएगा। 
  • प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर एक लूनर डे (चांद का एक दिन) में ही कई प्रयोग करेगा। चांद का एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है। 
  • ऑन बोर्ड कैमरों से सही स्थान का पता लगने पर 5 रॉकेट इंजनों की स्पीड 6 हजार किमी प्रति घंटा से शून्य हो जाने पर लैंडर कुछ देर हवा में तैरकर धीमे से उतर जाएगा।
  • लैंडर के अंदर रोवर प्रति 1 सेंटीमीटर/सेकंड की रफ्तार से लैंडर से बाहर निकलेगा। इसे निकलने में 4 घंटे लगेंगे। 
  • इसके बाद बाहर आकर ये चांद की सतह पर 500 मीटर तक चलेगा। 
  • लैंडर के 2 पे-लोड लैंडिंग साइट के पास तत्वों की मौजूदगी और चांद की चट्टानों-मिट्टी की मौलिक संरचना का पता लगाएंगे। 
  • पेलोड के जरिए रोवर ये डेटा जुटाकर लैंडर को भेजेगा, जिसके बाद लैंडर यह डेटा इसरो तक पहुँचाएगा।

चंद्रयान-2 से जुड़ीं महत्वपूर्ण बातें 

  • चंद्रयान-2 को जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च किया गया था जिसमे तीन मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) थे। 
  • चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो हैं जो चंद्रयान-1 मिशन के वजन 1380 किलो से करीब तीन गुना ज्यादा हैं। 
  • चंद्रमा की 12 डिग्री से ज्यादा ढलान वाली सतह पर लैंडिंग होने से इसके पलटने का खतरा रहेगा।
  • चद्रयान- 2 में मौजूद ऑर्बिटर चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद एक साल पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन स्थापित करेगा। इसके साथ ही ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार कर चांद के अस्तित्व और विकास का पता लगायेगा। 
  • चद्रयान- 2 में मौजूद रोवर चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाएगा।

लैंडर विक्रम के बारे में महत्वपूर्ण बातें 


  • लैंडर विक्रम नीचे से चार पैरों वाले स्टूलनुमा डिजाइन के ऊपर एक बॉक्स के आकार के डिजाइन का है। 
  • लैंडर विक्रम के सबसे नीचे की तरफ 800 N लिक्विड इंजिन लगा है। विक्रम के चारों स्टैंड में सबसे नीचे टच डाउन सेंसर लगा हुआ है और विक्रम के दोनों हिस्सों में सोलर पैनल लगे हुए हैं जो कि इसे सौर ऊर्जा से स्वत: चार्ज होने में मदद करते हैं।
  • इसके भीतर गोल्डन कलर का सोने की चमक वाला रोवर मौजूद है। 
  • इसके आगे वाले हिस्से में नीचे की तरफ लैंडर पोजिशन डिटेक्शन कैमरा LHDC लगा हुआ है जिसके जरिये उतरने से पहले चांद की सतह के बारे में जाना जा सकता है। इसी के साथ लैंडर हैजार्ड डिटेक्शन एंड एवाइडेंस कैमरा विक्रम को आने वाले खतरों की जानकारी भी देता हैं।
  • लैंडर के नीचे के हिस्से में LHVC यानी लैंडर होरिजोंटल वेलोसिटी कैमरा है जिसके जरिये चांद की सतह पर क्षैतिज वेग को भांपने की क्षमता है। जब रोवर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा तो उतरने से पहले चांद की सतह के वेग के बारे में बताएगा। 
  • विक्रम में दो रिमोट सेंसर है जिसमे से एक हिस्से मे ऊपरी पर्त में KA-BAND ALTIMETER-1 लगा हुआ है और दूसरा एक भाग में LASA  यानी लेजर एल्टी मीटर लगा हुआ है। ये दोनों दो रिमोट सेंसर गति को बढ़ाने या घटाने में मदद करते हैं।
  • इसमें एल्टिट्यूड सेंसर भी है जो विक्रम की सही लैंडिंग में मदद करते हैं। साथ ही लैंडर में लेजर रेंजिंग सिस्टम, ऑन बोर्ड कम्प्यूटर्स और कई सॉफ्टवेयर भी लगे है।

Comments

Trending