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Birthday special - किशोर कुमार

सिंगिंग लीजेंड किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त, 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था। मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार का देहांत 13 अक्टूबर,1987 को हार्ट अटैक से हुआ था। हिंदी सिनेमा जगत के किशोर कुमार 1500 से ज्यादा अलग-अलग भाषा में गाने गए सकते थे। 29 साल लीजेंड किशोर कुमार की सुरिली आवाज को खामोश होना पड़ा जब उन्हें हार्ट अटैक पड़ा और वो उनके फंस को छोड़कर दूसरी दुनिया में  चले गया गए थे। 

 किशोर कुमार की जन्मकथा 

एक मध्यवर्गीय बंगाली परिवार में जन्मे किशोर के पिता कुंजी लाल गांगुली एक अधिवक्ता थे। परिवार में जन्मे घर के सबसे छोटे बालक ने जन्म लिया तो ख़ुशी की लहर थी। लेकिन कौन जानता था कि सबसे छोटा बालक घरवालों का नाम रोशन करेगा और सबके दिलों में राज भी करेगा। अपने परिवार के सभी भाई-बहनों में सबसे नटखट बालक का नाम आभास कुमार गांगुली रखा गया जो आगे चलकर किशोर कुमार हो गया। 

पिता का पेशा वकालत थी मगर किशोर जन्म से ही संगीत में रूचि रखते थे और एक महान अभिनेता बनने का सपना देखते थे। वो सिंगर एवं गायक के.एल. सहगल के बड़े फैन थे और उन्ही की तरह एक महान गायक बनना चाहते थे। साथ ही वो मोहम्मद रफी, मुकेश और लता मंगेशकर जैसे बेहतरीन गायकों के चहेते गायक हैं। 

चार -चार शादियां कैसे की किशोर ने 

चार -चार शादियां करके किशोर कुमार बहुत विख्यात हुए थे। पहली बीवी रुमा देवी से आपसी अनबन के कारण तलाक हो गया था। फिर उनके जीवन  फिल्म 'महलों के ख्वाब' से मधुबाला आई और उनसे शादी के लिए अपना नाम भी बदल डाला। इस्लामिक नाम 'करीम अब्दुल' को अपनाकर अपना पुराना नाम छोड़ दिया। नौ साल बाद उनकी दूसरी बीवी मधुबाला ने दुनिया से अलविदा ले ली। अकेलेपन को दूर करने के लिए फिर किशोर ने 1976 में अभिनेत्री योगिता बाली के साथ शादी की। लेकिन कौन जानता था कि किशोर की चार शादी लिखी हैं और योगिता ने 1978 में  किशोर से तलाक ले लिया। अपनी चौथी शादी उन्होंने 1980 में की और उनकी ये शादी लीना चंद्रावरकर से की जिससे उन्हें दो बेटे भी हुए।

कैसा शुरू हुआ करियर 

सिंगर एवं गायक के.एल. सहगल के बड़े फैन किशोर को उनसे मिलने की चाहत 18 वर्ष के बालक को मुंबई खींच लायी लेकिन वो अपने महान अभिनेता से नहीं मिल पाएं। हालाँकि उन्हें बड़े भाई अभिनेता अशोक कुमार को इंडस्ट्री में सब जान चुके थे और वो अपनी पहचान भी बना चुके थे। उनके बड़े भाई उन्हें भी अभिनेता बनाना चाहते थे लेकिन संगीत की और किशोर का रुझान अधिक था। वो एक बेहतर पाश्र्व गायक बनने की चाह रखते थे लेकिन उनके भाई अशोक कुमार की वजह से उन्हें बॉलीवुड में अभिनेता के रोल मिल रहे थे। लेकिन संगीत का जादू किशोर को लीजेंड  बनने के सपने को पूरा करने में सफल रहा और किशोर कुमार ने 1951 मे मुख्य अभिनेता के तौर पर फिल्म ‘आंदोलन’ से अपने करियर की शुरुआत की। हालाँकि दर्शकों को ये लुभा नहीं पायी। इसके बाद फिल्म ‘लड़की’ से अपनी पहचान बनाकर और अपने करियर की पहली हिट फिल्म देकर उन्होंने इंडस्ट्री पहचान बनाई। एक समय ऐसा भी था जब उन्हें फिल्मों में काम ही नहीं मिलता था। जीवनयापन करने को मजबू किशोर ने स्टेज शोज करके अपना जीवन चलाया।बंगला, मराठी, गुजराती, कन्नड, भोजपुरी और उडिया भाषा की फिल्मों के सात-साथ किशोर कुमार ने 600 से अधिक हिंदी फिल्मों के गानों में अपनी आवाज दी। 

कैसे मिली पहचान 

संगीतकार ओ.पी. नैय्यर ने उनकी आवाज़ के जादू को पहचाना जब बंबई में आयोजित एक स्टेज कार्यक्रम के दौरान ने वो गाना गए रहे थे। वो उनकी आवाज़ से भावविह्लल हो उठें।  उन्होंने किशोर को एक महान गायक बताकर कहा कि ,"महान प्रतिभाएं तो अक्सर जन्म लेती रहती हैं, लेकिन किशोर कुमार जैसा पाश्र्व गायक हजार वर्ष में केवल एक ही बार जन्म लेता है। इस बात को पाश्र्व गायिका आशा भोंसले ने भी ने भी हामी भर दी। 

‘आराधना’ से बने गायकी के दुनिया के बेताज बादशाह

वर्ष 1969 में निर्माता निर्देशक शक्तिसामंत की फिल्म ‘आराधना’ के जरिए किशोर कुमार का जीवन पलट गया और उन्हें कुछ ऐसा करने का मुका मिला जिसकी तलाशमे वो शुरू से थे। गायकी के दुनिया के बेताज बादशाह  आखिरकार रंग लाया और वो संगीत की दुनिया में छा गए। पहला फिल्मफेयर पुरस्कार उन्हें गाने "रूप तेरा मस्ताना के लिए बतौर दिया गया। 

किशोर कुमार ने कई अभिनेताओं को अपनी आवाज दी, लेकिन कुछ मौकों पर मोहम्मद रफी ने उनके लिए गीत गाए थे। दिलचस्प बात यह है कि मोहम्मद रफी, किशोर कुमार के लिए गाए गीतों के बदले सिर्फ एक रुपया पारिश्रमिक लिया करते थे। वर्ष 1987 मे किशोर कुमार ने फिल्मों से संन्यास लेकर और वापस अपने गांव खंडवा जाने की सोची। वह अक्सर कहा करते थे कि,' दूध, जलेबी खाएंगे खंडवा में बस जाएंगे"।लेकिन सपने कहा पुरे होते है । 13 अक्तूबर 1987 को किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया से विदा हो गए। 8 बार फिल्मफेयर पुरस्कार जीतें के साथ उन्होंने फैंस के दिलों को भी जीत लिया।

क्या विवाद हुए किशोर जी को लेकर 

संगीत के बेताज बादशाह कई बार विवादों के भी शिकार हुए। आपातकाल के दौरान 1975 में देश में दिल्ली में एक सांस्कृतिक आयोजन में उन्हें गाने का मौका मिला लेकिन अपने पैसे मांगने पर उन्हें सजा मिली और उनके गाने को आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रतिबंधित कर दिया गया। आपातकाल हटने के बाद उन्हें दुबारा सम्मान मिला।  5 जनवरी 1977 को उनका पहला गाना बजा ‘दुखी मन मेरे सुनो मेरा कहना, जहां नहीं चैना वहां नहीं रहना’ बहुत चला।  

मशहूर पार्श्र्वगायक किशोर कुमार के कुछ मशहुर गीत

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