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इसरो का रॉकेट मैन - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत का सपना मिशन मून-2 -  चंद्रयान-2 लांच हो चूका हैं। चांद पर चंद्रयान-2 को भेजकर भारत ने अपना सच्चा सच कर लिया। हालाँकि कुछ दिन पहले जब इसरो द्वारा chandrayaan-2 लॉन्च किया जाना था लेकिन दिन शुरू होते के लगभग 1 घंटे पहले ही उस चंद्रायण में वैज्ञानिकों द्वारा एक त्रुटि पाई गई जिसकी वजह से chandrayaan-2 के लॉन्च को रोक दिया गया। उसके बाद इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने चंद्रयान-2 की कमियों को ठीक करके 22 जुलाई, 2019 को इसे लांच किया। दुनिया के केवल पांच देश  - अमेरिका, रूस, यूरोप, चीन और जापान ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग  का श्रेय ले पाए है और भारत इसमें छठा देश होगा।

ISRO

चंद्रयान-2 की सफलता का श्रेय 

भारत का सपना मिशन मून-2 -  चंद्रयान-2 तो लांच हो गया और इसकी सफलता को लेकर सभी भारतीय गर्व महसूस कर रहे थे लेकिन क्या आप ये जानते है कि इसकी सफलता के पीछे किसका हाथ था। इसकी सफलता का श्रेय जाता है  - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष - कैलासवादिवो सिवन (Kailasavadivoo Sivan) जी को। भारत के दूसरे महत्वाकांक्षी मिशन 'चंद्रयान-2'  (Chandrayan-2) को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा (Shriharikota) से अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट लॉन्चर GSLV Mk III के जरिये चांद के  सफर पर भेजने के पीछे  इसरो के अध्यक्ष सिवान जी का बहुत बड़ा श्रेय हैं

इसरो का 'रॉकेट मैन - सिवन 

अंतरिक्ष में भारत की छवि को बनाने के इस महत्वाकांक्षी मिशन के पीछे जिस इंसान ने 'चंद्रयान-2' की अपनी टीम के साथ सालों की मेहनत करके  भारत के सपने को साकार किया है वो है - ISRO के अध्यक्ष सिवन। इसरो के अध्यक्ष सिवान को 'रॉकेट मैन  के नाम से बुलाया जाता हैं। सरकारी स्कूल से तमिल भाषा में शिक्षा प्राप्त सिवन तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के सराक्कलविलाई गांव के एक किसान के बेटे हैं। किसान का बेटा होने के बावजूद आज के समय में वो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष का पद संभाल सँभालते हुए उन्होंने चंद्रयान-2 के मिशन का नेतृत्व भी किया। 

नागेरकोयल के एसटी हिंदू कॉलेज से स्नातक के बाद 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। सिवन अपने परिवार के पहले सदस्य यहीं जिन्होंने स्नातक की पढाई की। सिवन ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसिज (IISC) से इंजीनियरिंग में मास्टर्स करने के बाद 2006 में IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की। इतना सब करने के बाद उनके कदम रुके नहीं और आज वो इसरो के अष्यक्ष पद की गरिमा बढ़ा रहे हैं।

क्या कहते है इसरो अध्यक्ष 

सिवन से बातचीत के दुआरण उन्होंने बताया कि,"मैं कॉलेज में पड़ते हुए खेतों में अपने पिता की मदद भी किया करता था। इसी कारणवश मेरे पिता ने मेरा दाखिला घर के पास वाले कॉलेज में कराया था। जब मैंने Bsc (गणित) 100 प्रतिशत अंकों के साथ पूरी किया तो उन्होंने अपना मन बदल लिया। मैंने अपना  बचपन बिना जूतों और सैंडल के गुजारा है। मैं कॉलेज तक धोती पहना करता था। मैंने MIT में पहली बार पैंट पहनी थी।

ISRO के रॉकेट मैन कैसे बने  

सिवन ने 1982 में इसरो को ज्वाइन करते अपना पद संभाला। इसरो के सभी रॉकेट से संभंधित प्रोजेक्ट्स में भाग लेकर उन्होंने अपना महान योगदान दिया।  जनवरी 2018 में इसरो के अध्यक्ष का पद सँभालते हुए उन्होंने कई बड़े काम किये। इससे पहले वो सेंटर रॉकेट बनाने वाले विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के निर्देशक थे। साइक्रोजेनिक इंजन, PSLV, GSLV, और रियूसेबल लॉन्च व्हीकल जैसे प्रोजेक्ट्स में अपना महान  योगदान देने की वजह से उन्हें इसरो का रॉकेट मैन कहा जाता है। 

सिवन की सफलता का सफर

15 फरवरी 2017 को एक साथ 104 उपग्रहों को लॉन्च करके इसरो का विश्व रिकॉर्ड बनाने में अहम भूमिका निभाकर उन्होंने पहली उपलब्धि हासिल की और उनके कदम सफलता की ओर बढ़ते गए।  

5 जुलाई 2019 को लांच होने वाले चंद्रयान-2 की तकनीकी दिक्कत को 24 घंटे के अंदर ठीक करके उन्होंने सबके दिलों में अपनी जगह बना ली। जैसा की आप सब जानते है कि 15 जुलाई को  इसरो के वैज्ञानिकों चंद्रायण को लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर रहे थे तभी चंद्रयान लॉन्च से ठीक 56 मिनट 24 सेकेंड पहले चंद्रायण में आई तकनीकी खराबी का ज्ञान हुआ और रात 1 बज कर 36 सेकेंड पर चंद्रायण लॉन्च रोक दिया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि समय रहते उन्होंने इस त्रुटि का ज्ञान कर लिया अन्यथा इसके लॉन्च से एक बड़ी दुर्घटना का होना संभव था। इसका श्रेय भी सीवन जी को जाता हैं। 

सिवन ने एक उच्च स्तरीय टीम बनाकर 24 घंटे के अंदर तकनिकी खराबी को ठीक करके सात दिनों के बाद चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को सफलता पूर्वक लॉन्च किया।  

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