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विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस: विनाश से बचने के लिए है बहुत जरूरी, सिर्फ मनाने से नहीं चलेगा काम

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 28 जुलाई को दुनिया भर में मनाया जाता है। इस दिवस का मुख उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और समाज में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस प्रकृति संरक्षण में सुधार कर बेहतर जीवन स्थितियों का जीवनयापन करने के लिए मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और प्रकृति के साथ-साथ जानवरों के अच्छे जीवन और प्राणियों के विकास के लिए बेहतर समाज की स्थापना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

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क्यों जरूरी है प्रकृति का संरक्षण

हमारे शरीर की प्रत्येक गतिविधि प्रकृति की स्थितियों पर निर्भर करती है। पृथ्वी पर सभी जीवों के जीवनयापन के लिए और उनके अस्तित्व को बनाए रखने के लिए प्रकृति संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण है।

प्राकृतिक संसाधनों में ये तत्व शामिल हैं - पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और अग्नि। प्रकृति संरक्षण के संरक्षण के लिए ये पांच तत्व महत्वपूर्ण हैं। पृथ्वी, जल, वायु और आकाश को मनुष्य द्वारा बनाए गए वातावरण के चलते द्वारा बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

मनुष्यों द्वारा किए गए पर्यावरण के नुकसान ने पृथ्वी, वायु, जल और आकाश को बहुत सारी समस्याएं दीं। हमारे स्वस्थ जीवनयापन के लिए और पृथ्वी को बचे रखने के लिए प्रकृति का संरक्षण करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

आज की पीढ़ी प्रदूषण के कारण कई समस्याओं का सामना कर रही है। जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण की वजह से इंसानों के साथ-साथ पूरी दुनिया के जानवर भी परेशान हैं। मनुष्य हमेशा विकास के नाम से प्रकृति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। कभी रोड बनवाने के लिए पेड़ कटा दिए जाते हैं तो कभी परमाणु परीक्षण के चलते वायु को प्रदूषित कर दिया जाता है। 

विश्व में जनसंख्या बहुत अधिक बढ़ रही है और उनके जीवन की रक्षा के लिएप्रकृति का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। अगर प्रकृति स्वस्थ नहीं रहेगी और जनसँख्या में वृद्धि होती रहेगी तो इससे प्रदूषण बढ़ेगा और मनुष्य की उम्र बहुत कम हो जाएगी। 

इंसान प्रकृति संरक्षण का पहला दुश्मन है और प्रकृति का शिकार करने में किसी भी तरह से पीछे नहीं हटता है। यदि प्रकृति अच्छी है, तो मनुष्य के साथ-साथ दुनिया में जानवर भी सुरक्षित हैं। इसलिए पर्यावरण के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों जैसे पेड़, नदी आदि की रक्षा करने की आवश्यकता है। 

प्रदूषण का असर हमारे दैनिक जीवन को बिगाड़ रहा है। इसलिए प्रकृति संरक्षण की आवश्यकता बहुत महत्वपूर्ण है और अपनी प्रकृति की रक्षा के लिए हमें न किसी के कहने पर बल्कि अपनी स्वेच्छा से आगे आना होगा। क्योंकि, यह सिर्फ एक मनुष्य या सरकारों के द्वारा संभव नहीं है। अगर प्रकृति की रक्षा करनी है तो हम सभी को इसके लिए आगे आना होगा। प्रकृति का संरक्षण सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करता है।

सरकार कई बार लागू कर चुकी है अधिनियम

केंद्र और राज्य सरकारों ने प्रकृति के संरक्षण के लिए अधिनियमों को लागू किया और कई वर्षों से एक साथ कई योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू कर रहे हैं। लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं क्योंकि, कमी देशवासियों में ही है। जब तक हम एकजुट होकर प्रकृति की रक्षा नहीं करेंगे देश का विकास कभी नहीं हो सकता है। हमें इस मुद्दे पर गौर करना होगा और पर्यावरण की समस्याओं के अंत के लिए आगे आना पड़ेगा।

सरकार लागू कर रही है कई योजनाएं

सरकार लोगों की भागीदारी के साथ प्राकृतिक की रक्षा के लिए योजनाएं लागू कर रही है। केंद्र और राज्य सरकारें देश में हर घर में शौचालय के निर्माण के लिए और स्वच्छता की स्थिति में सुधार के लिए स्वच्छ भारत जैसे कई कार्यक्रमों को लागू कर रही हैं।  लोगों के बीच स्वच्छता की स्थिति को बनाए रखने के लिए सड़कों, नालियों की सफाई करने खुद प्रधानमंत्री मोदी भी झाडू लेकर उतर पड़े हैं।

केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छ और सुरक्षित जल और अन्य जल संरक्षण योजनाओं के लिए गंगा कायाकल्प योजना देश में नदियों की स्थिति में सुधार लाने के लिए लागू की जा रही है। तेलंगाना राज्य में सरकार प्रकृति की सुरक्षा के लिए हरितम हरम, मिशन काकतीय जैसी योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू कर रही है और राज्य में बेहतर जीवनजीने के लिए प्रदूषण के स्तर में सुधार कर रही है। सभी योजनाओं और कार्यक्रमों में जल संरक्षण योजनाओं को बड़े पैमाने पर लागू किया गया है और साथ ही किसानों को उनकी खेती की जरूरतों के लिए सोख गड्ढों और फार्म तालाबों का निर्माण किया गया है।

तेलंगाना पंचायती राज अधिनियम, 2018 के तहत सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत के अंतर्गत हर साल 40,000 पौधे लगाने की कोशिश कर रही है और उनमे  से 85 प्रतिशत पौधों को जीवित रखने की पूरी कोशिश भी कर रही है।  अगर 85 प्रतिशत पेड़ जीवित नहीं रहे तो उससे संबंधित अधिकारी को नए पीआर अधिनियम के अनुसार दंड भी दिया जाता है। इस प्रकार की साहसिक पहल तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा की जा रही है। 

इसी तरह हर राज्य में प्रकृति के संरक्षण के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

हमें होना पड़ेगा जागरूक

जब तक देश की जनता खुद जागरूक नहीं होती है तब तक प्राकृतिक संरक्षण के मुद्दे को साकार नहीं किया जा सकता है। हमें हमारे भारत में चलाए गए स्वच्छ भारत मिशन और गंगा कायाकल्प योजाना जैसे कई मिशन का साथ देना चाहिए।

इसके अलावा अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें पेड़ नहीं काटने चाहिए, नदियों में कचरा नहीं फेंकना चाहिए, धुआं नहीं करना चाहिए, और इसके साथ कई तरह की प्राकृतिक सम्प्रदाओं की रक्षा का जिम्मा उठाना चाहे।

सिर्फ विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मन लेने से विश्व की प्रकृति का संरक्षण नहीं हो सकता है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ना होगा और प्रकृति संरक्षण के दायित्व का संकल्प उठाना होगा।

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