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दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है हेपेटाइटिस का खतरा, जाने इसकी रोकथाम का उपाय…

देश में बढ़ती बीमारियों को देखकर दिन प्रतिदिन उनके नए इलाजो की खोज की जा रही है। परंतु कुछ बीमारियां देश पर एक विशालकाय दानव की तरह अपना कब्जा जमाते जा रहे हैं। देश के बहुत से नागरिक कई सारी बीमारियों से पीड़ित हैं जिनमें से एक हेपेटाइटिस बी है। प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई के दिन हेपेटाइटिस वर्ल्ड डे मनाया जाता है। भारत के नागरिकों को हेपेटाइटिस को लेकर बहुत जागरूक किया जाता है इसके बावजूद भी प्रत्येक वर्ष हेपेटाइटिस बी की बीमारी की वजह से लगभग 14 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। देश के बड़े-बड़े डॉक्टर द्वारा इस बीमारी को लेकर कई इलाज ढूंढे जा रहे हैं और लगातार लोगों में जागरूकता भी फैलाई जा रही है। इसके बावजूद भी भारत की जनता के लगभग 80% लोग हेपेटाइटिस बी से जुड़ी सावधानियों को लेकर अनजान है। 

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यह एक बहुत बड़ा कारण है कि लोग प्रत्येक वर्ष हेपेटाइटिस बी का शिकार होते हैं जिसकी वजह से वे अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं। देश में बड़ी बड़ी बीमारियों जैसे टीवी, कैंसर आदि के इलाज को लेकर जिस तरह सरकार जागरूकता फैला रही है और लोगों को सुविधाएं प्रदान कर रही हैं ठीक उसी तरह से हेपेटाइटिस बी जैसी बीमारी के लिए भी सरकार द्वारा बहुत सी सुविधाएं प्रदान की जा रही है। परंतु लोगों की अज्ञानता के कारण वे इस चीज का फायदा नहीं उठा पाते हैं और हेपेटाइटिस बी का शिकार हो जाते हैं।

लापरवाही के कारण बढ़ रही है बीमारी

अज्ञानता के कारण जो लोग लापरवाही बरत ते हैं वह लोग अपने स्वास्थ से खिलवाड करते हैं और हेपेटाइटिस का शिकार हो जाते हैं। हेपेटाइटिस एक संक्रामक रोग है जो एक रोगी से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को जल्द ही फैल जाता है। यदि कोई इस रोग से ग्रस्त है तो उसके साथ पूरी सावधानी बरतनी चाहिए ताकि वह किसी स्वस्थ व्यक्ति को अपना शिकार ना बनाएं। दूसरा सबसे बड़ा कारण यह है कि लोग इस्तेमाल किया गया इनफेक्टेड इंजेक्शन दूसरे स्वस्थ मरीज को लगा देते हैं जिसकी वजह से वह भी इस रोक से पीड़ित हो जाता है। इनफेक्टेड इंजेक्शन के कारण लोग हेपेटाइटिस बी और सी के शिकार हो जाते हैं।

क्या है हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस रोग एक संक्रामक रोग है जो मां से बच्चे को और यौन संबंध बनाते समय एक व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को आसानी से हो जाता है। यह आमतौर पर पाया जाने वाला एक ऐसा वायरस है जो जल्द ही स्वस्थ लोगों को अपना शिकार बनाता है। यदि किसी पीड़ित व्यक्ति का संक्रमित रक्त किसी स्वस्थ व्यक्ति पर पड़ जाए तो वह भी इस रोग से ग्रस्त हो जाता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार पूरे विश्व में इस संक्रमण की वजह से 1.4 ग्रसित होकर अपनी जान गवा बैठे हैं। 

कैसे होगी इसकी रोकथामकिसी भी बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए समय लगता है परंतु उस पर बल देने की जरूरत होती है।

  •  यदि सरकार द्वारा इस बीमारी को खत्म करने के लिए जागरूकता अधिक से अधिक फैलाई जाए और लोगों को संक्रमण के बारे में पूरी जानकारी दी जाए तो लोग सतर्क होकर इस बीमारी से ग्रसित नहीं होंगे। 
  • इनफेक्टेड इंजेक्शन का इस्तेमाल बिल्कुल खत्म हो जाना चाहिए ताकि लोगों को इस बीमारी का संक्रमण ना मिले। 
  •  यदि कोई व्यक्ति इस रोग से ग्रसित हो जाता है तो उसे जागरुक होने की जरुरत है साथ ही उसके परिवार को इस से जुड़ी सभी जानकारियां सरकारी अस्पतालों द्वारा प्रदान की जानी चाहिए। ताकि परिवार के सदस्य इस बीमारी से ग्रसित होने से खुद को बचाव कर सकें।
  • इंजेक्शन के इस्तेमाल के बाद उसे प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में ऑटो डिसएबल करने के कड़े निर्देश होने चाहिए। ताकि उन इनफेक्टेड इंजेक्शनों का दोबारा इस्तेमाल करके किसी भी स्वस्थ इंसान को इस रोग से ग्रसित ना होना पड़े। 

बीमारी के परिणाम

यदि कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस से ग्रस्त हो जाता है तो उसके लिवर में धीरे-धीरे सूजन आने लगती है। लीवर में बढ़ते इंफेक्शन की वजह से वह लीवर कैंसर का भी रूप ले सकता है। अगर ऐसे में लापरवाही की जाए तो लीवर पूरी तरह से डैमेज हो जाता है जिसकी वजह से मरीज को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

लंबे समय से इस बीमारी के उपचार के लिए पहले से ही टीकाकरण उपलब्ध है। यह बात अलग है कि लोग जागरूकता की वजह से इस टीकाकरण को नहीं करवा पाते हैं और इस बीमारी से ग्रसित होने लगते हैं। सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों के बाद भी भारत देश में लगभग 4 से 5 करोड लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं और प्रत्येक वर्ष मौत के मुंह में जा पहुंचते हैं। 

इस बीमारी से छुटकारा पाने का सबसे बेहतरीन तरीका यही है कि अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जाए ताकि वह इस संक्रमण से अपने आप का बचाव कर सकें।

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