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अलविदा कहने से पहले कलाम के मुह से निकले से ये आखिरी लफ्ज

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को अलविदा हुए आज 4 साल हो गए। आज ही के दिन अब्दुल कलाम ने अपने पार्थिव शरीर को छोड़ा था। इनका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम था। इन्हें मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता था तथा  ये वह अमूल्य खजाना थे जिसकी भरपाई कोई भी नहीं कर सकता। 

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धरती को जीने लायक कैसा बनाया जाए

एपीजे अब्दुल कलाम के अंतिम समय में सृजन पाल सिंह उनके साथ ही थे और उन्होंने बताया कि अपने जीवन के अंतिम क्षणों में अब्दुल कलाम क्या बातें कर रहे थे। रीजन पाल ने बताया कि 27 जुलाई को दोपहर के 3:00 बजे उन्होंने दिल्ली से गुवाहाटी का सफर तय किया। फिर उन्हें सिलार जाना था जहां पहुंचने में करीब ढाई घंटे लग गए। लंबे रास्तों में अक्सर कलाम साहब कार में नींद लिया करते थे लेकिन इस वक्त ऐसा नहीं हुआ और पूरे रास्ते वह बात करते आए। आई आई एम के छात्रों से कुछ सवाल पूछने का जिक्र किया और फिर खाना खाकर आई आई एम पहुंच गए।

जब स्पीच देने के लिए कलाम स्टेज पर पहुंचे तब सृजन पाल सिंह जी उनके पीछे ही खड़े थे। उन्होंने सृजन पाल सिंह से पूछा ऑल फिट? तो उन्होंने जवाब दिया जी साहब। इतना कहते ही वह गिर पड़े और तुरंत पाल ने उन्हें अपने बाहों पर उठाया। उन्हें जल्दी से हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका। स्वर्गवासी होने से पहले उनके अंतिम शब्द थे धरती को जीने लायक कैसे बनाया जाए”। 

सृजन पाल सिंह ने बताया कि कलाम साहब की हमेशा से इच्छा थी कि पूरा देश उन्हें अध्यापक के रूप में याद करें। पढ़ाते पढ़ाते ही उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और IIM के स्टूडेंट्स को महत्वपूर्ण असाइनमेंट नही दे पाए।

कलाम साहब हमेशा ग्रामीण भारत के विकसित होने की बात किया करते थे। वह चाहते थे कि युवा खुद ही सशक्त हो। उनके सभी विचार आज हमारे लिए प्रेरणा के तौर पर अमर हैं। उन्हें अपने पूरे जीवन में बस एक बात का दुख था कि अपने माता-पिता को वो 24 घंटे जैसी बिजली की सुविधाएं प्राप्त नहीं करा पाए।

देश को दी अनोखी मिसाइलें

कलाम की बदौलत आज अपने देश की सैन्य ताकत इतनी मजबूत है। अबदुल कलाम अपने दौर के बेतर साइंटिस्ट में से एक थे जिन्होंने भारत को तरह-तरह की मिसाइलें दीं। इन्होने के सीरीज की कई साड़ी मिसाइलों का निर्माण किया था। इसके अलावा अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल जैसी अधिक मारक क्षमता वाली मिसाइल सेना बल को प्रस्तुत कर उन्होंने देश की सुरक्षा में चार चांद लगा दिए।

परमाणु परीक्षण में बतौर वैज्ञानिक किया काम

अटल बिहारी वाजपयी की सरकार के दौरान भारत से अमेरिका से छिपते-छिपाते एक सफल परमाणु परीक्षण किया था। इस परीक्षण में अब्दुल कलाम ने बतौर वैज्ञानिक काम किया था। परमाणु परीक्षण के दौरान होने वाले सही कार्यों की विशेष निगरानी इनके द्वारा की जाती थी। और बिना किसी रिस्क के भारत ने इनके और इनकी टीम की बदौलत परमाणु का सफल परीक्षण किया।

पढ़ने में रखते थे ख़ास रूचि

अब्दुल कलाम बहुत ही छोटे परिवार से थे। उनकी पारिवारिक स्थिति कमजोर होने के चलते वे न्यूज़पेपर बेचा करते थे। लेकिन, अब्दुल कलाम की रूचि पढ़ाई में भी बहुत ज्यादा थी। और वे काफी मेहनत के बाद भी पढ़ाई के साथ जुड़े रहते थे। वे कक्षा में हमेशा प्रथम उत्तीर्ण होते हैं और उनके पढ़ाई के प्रति लगन को देखकर वहां के शिक्षक भी कलाम से बहुत ज्यादा स्नेह करते थे। फिजिक्स की डिग्री प्राप्त करने के बाद कलाम एमआईटी 

(मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) में एयरोस्पेस की शिक्षा लेने के लिए पहुंच गए। वहां पर उन्होंने बहुत लगन से पढ़ाई की।

पढ़ाई के बाद कलाम ने कई तरह के संगठन ज्वाइन किये और अपने ज्ञान की वजह से कई तरह के साइंटिफिक उपकरण तैयार करने लगे। इसके बाद कलाम ने कई बड़े टेस्ट किये और सफल हुए। कलाम ने भारत को कई तरह की मिसाइलें दी जिससे भारत की सैन्य बल काफी मजबूत हुई।

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