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यह है फिल्म 2.0 में नज़र आये पक्षी राजन के जीवन की असली कहानी

कई बार रिलीज़ डेट बदलने के बाद आखिरकार 29 नवंबर 2018 को रिलीज़ हुयी फिल्म 2.0 सिनेमाघरों में ताबड़तोड़ कमाई कर रही है। फिल्म रिलीज़ होने के पहले ही एडवांस बुकिंग के जरिये 100 करोड़ का व्यापार कर चुकी थी। यह 2010 में आई फिल्म एन्थीरन (रोबोट) का सीक्वल है, जिसका निर्देशन शंकर ने किया है और फिल्म में संगीत दिया ऑस्कर विजेता ए.आर रहमान ने। फिल्म में मुख्य नायक की भूमिका अदा की है तमिल सुपरस्टार रजनीकांत ने और विलेन का रोल निभाया है बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर अक्षय कुमार ने। गौरतलब है कि इससे पहले विलेन का रोल मिस्टर परफेक्शनिस्ट यानि कि आमिर खान को ऑफर किया गया था जिन्होंने उनकी फिल्म ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान की व्यस्तता के चलते उसे ठुकरा दिया था। हालाँकि वह फिल्म बॉक्स ऑफिस डिजास्टर रही।

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खेर, जहाँ एक तरफ दर्शकों को फिल्म की कहानी से थोड़ी सी नाराजगी है वहीं दूसरी ओर फिल्म में मौजूद व्ही.एफ.एक्स की जमकर सराहना की जा रही है। फिल्म 2.0 भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म है। यह भारत में बनने वाली पहली ऐसी फिल्म है जिसे पूरी तरह से थ्रीडी में शूट किया गया है।

pakshi rajan

फिल्म की कहानी के जरिये लोगों को मोबाइल से निकलने वाली खतरनाक रेडिएशन्स से पक्षियों को होने वाले नुक्सान के बारे में बताया गया है। यह फिल्म एक वैज्ञानिक पक्षीराजन के बारे में है जो लोगों से बदला लेने के लिए उनके मोबाइल फोन्स जब्त करने लगता है। आइये जानते है क्या है असली दुनिया के पक्षी राजन की कहानी जिनका किरदार अक्षय कुमार ने निभाया है।

सलीम अली थे असली दुनिया के पक्षी वैज्ञानिक:

फिल्म में दिखाए गये पक्षी राजन का असली किरदार दरअसल 1896 में मुंबई में जन्में पक्षी वैज्ञानिक सलीम अली के जीवन से प्रेरित है। पक्षियों के लिए उनके प्यार और लगाव की वजह से उन्हें भारत का “बर्डमैन” भी कहा जाता है। पक्षियों की सुरक्षा के लिए उनके द्वारा किये गये कार्यों को देखते हुए उन्हें 1958 में भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण और 1976 में दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी नवाज़ा गया।

भारत में मौजूद कई प्रकार के पक्षियों, संस्थाओं एवं पक्षी अभ्यारण्यों के नाम उनके नाम के ऊपर रखे रखे गये हैं।

चेन्नईयम अदैयलम से मिली जानकारी के अनुसार बचपन में ही अनाथ हो गये सलीम अली को उनके मामू अमिरुद्दीन ने पाल-पोष कर बड़ा किया और उन्हें प्रकति से प्यार करना सिखाया। पक्षी विज्ञान से उनका पहला तार्रुफ़ “बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री साइंस” ने करवाया। आगे चलकर उन्हें भारत एवं भारत के बाहर मौजूद पक्षियों की अलग-अलग तरह की प्रजातियों के बारे में सर्वेक्षण करने के लिए भी  भेजा गया। धीरे-धीरे पक्षियों के साथ उन्हें अन्य वन्य प्राणियों से भी लगाव होने लगा और वह उनके संरक्षण में जुट गये।

पक्षियों के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए उन्होंने कुछ किताबें भी लिखी। उन्होंने सिखाया कि इस दुनिया पर वन्य प्राणियों का भी उतना ही अधिकार है जितना मानव जाति का है। 1987 में कैंसर की बीमारी के चलते 91 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

हम सलीम अली भले ही ना बन पायें लेकिन हम उनके विचारों एवं उनके जीवन से यह सीख अवश्य ले सकते हैं कि धरती पर मौजूद सभी वन्य प्राणी हमारी जिम्मेदारी हैं एवं निस्वार्थ होकर उनका संरक्षण करना हमारा दायित्व है।

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