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आजादी के बाद जन्म लेने वाले पहले पीएम हैं मोदी, जानें उनके जीवन से जुड़ी खास बातें

नई दिल्ली: साल 2014 में बहुमत से लोकसभा चुनाव जीतने वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन द्वारा तत्कालीन गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया गया था. लगभग 10 साल कांग्रेस के राज के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रित गठबंधन की यह सबसे बड़ी जीत थी. वहीं आपको बता दें, कि आज (सोमवार) पीएम मोदी का जन्मदिन है और उनके 68वे जन्मदिन पर हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बाते बताने वाले हैं. 
दरअसल, पीएम मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री है जिनका जन्म आजादी के बाद हुआ है. आपको बता दें, उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था. इसके अलावा वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री है जिनके प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार संभालने के वक्त उनकी मां जिंदा थी. वहीं, वह उच्चतम मार्जिन (लगभग 5.70 लाख; वडोदरा) द्वारा लोकसभा सीट जीतने का रिकॉर्ड भी रखते हैं. 

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परिवार और निजी जीवन
नरेंद्र दामोदादास मोदी गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर शहर में विक्रेता के परिवार में पैदा हुए थे. उनकी मां का नाम हीराबेन मोदी और पिता का नाम दामोदार मूलचंद मोदी है. पीएम मोदी ने काफी मुश्किल वक्त का सामने करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की. उनकी जिंदगी में मुश्किलें बहुत ही छोटी उम्र में आ गईं. वह पहले अपने बड़े भाई के साथ वडनगर में चाय का स्टॉल चलाते थे. 
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई वडनगर में ही की. जिसके बाद उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी से पोलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. उनके स्कूल टीचर्स में से एक ने कहा था, वह पढ़ाई में एक सामान्य बच्चा है लेकिन डिबेट करने में माहिर है.
मास्टर की पढ़ाई करते वक्त ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ज्वाइन कर लिया था और आरएसएस के लिए एक प्रचार के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था. उन्होंने 17 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था और उसके बाद वह 2 साल तक देशभर में घूमे थे. 
साल 1990 में जब नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में बीजेपी के स्पोकपर्सन के तौर पर काम किया था तब उन्होंने यूएस में पब्लिक रिलेशन और इमेज मेनेजमेंट का कोर्स खत्म किया था. 
नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर
नरेंद्र मोदी में हमेशा से ही जरूरतमंद लोगों की मदद करने की इच्छा थी और इसे लेकर एक अलग ही उत्साह रहा है. अपने जवानी के दिनों में उन्होंने 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान रेलवे स्टेशनों पर सैनिकों को अपनी सेवाएं प्रदान की थी. वहीं 1976 में गुजरात में आई बाढ़ के वक्त भी उन्होंने कई लोगों की मदद की थी. जिसके बाद मोदी ने गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी कैंटीन में काम करना शुरू कर दिया था. जिसके बाद वह आरएसएस का हिस्सा बन गए. 
जिसके बाद उन्होंने नागपुर में आरएसएस की ट्रेनिंग भी ली थी. संघ परिवार में आधाकारिक पद लेने के लिए आरएसएस की ट्रेनिंग लेना अनिवार्य था. मोदी के ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्होंने छात्र विंग सौंप दिया गया. जिसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नाम से भी जाना जाता है. 
भारत में एमरजेंसी लागू होने के बाद मोदी द्वारा किए गए काम को पार्टी ने काफी सराहा था. जिसके बाद उन्हें गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का क्षेत्रिय आयोजक बना दिया गया था. वह छोटी उम्र से ही एक अच्छे आयोजक की तरह काम कर रहे थे. 
आपातकाल के दौरान, उन्होंने आरएसएस पुस्तिकाओं के गुप्त परिसंचरण की व्यवस्था की और आपातकालीन शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया. अपने आरएसएस के दिनों के दौरान, उन्होंने दो जनसंघ के नेताओं, वसंत गजेंद्रगढ़कर और नाथलाल जाघदा से मुलाकात की, जिन्होंने बाद में गुजरात में बीजेपी की राज्य इकाई की स्थापना की थी. 1987 में, आरएसएस ने बीजेपी में अपनी उम्मीदवारी की सिफारिश करके नरेंद्र मोदी को राजनीति में नियुक्त करवाया. मुरली मनोहर की एकता यात्रा के वक्त उन्होंने नरेंद्र मोदी की दक्षता को पहचान लिया था जिसके बाद उन्होंने पीएम मोदी को राजनीति में आगे बढ़ने का मौका दिया था. 
अपने जीवन में हमेशा ही लोगों के भले के लिए सोचने वाले और पूरा जीवन लोगों के लिए काम करने वाले मोदी ने 2014 के चुनावों में देश का दिल भी जीत लिया और सत्ता में विराजे. आज देश की जनता उन्हें काफी सम्मान देती है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 68वें जन्मदिन पर हमारी और देश की तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं. 

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