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अटल बिहारी वाजपेयी जी का आखिरी सफर

पूरे देश भर में अटल बिहारी वाजपेयी जी के निधन के शोक की लहर दौड़ रही है। 16 अगस्त 2018 की शाम 6 बजे अटल युग की समाप्ति का दिन रहा। 25 दिसम्बर 1924 से लेकर अटल जी के पूरे जीवन का चारो तरफ व्याख्यान का जा रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं और भाषणों की गूंज अभी भी कानों में पड़ रही है ऐसा लग रहा है मानों वे अभी भी यही हमारे पास है।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री होने के साथ –साथ अटल बिहारी वाजपेयी जी एक कवि, लेखक , पत्रकार , नेता भी रहे थे। प्रत्येक क्षेत्र में उन्होनें ने अपनी एक अलग पहचान और नाम स्थापित किया हुआ , जिन्हें आज पूरी दुनिया अलग –अलग किरदारों के लिए याद कर रही है।

वाजेपयी जी के निधन पर समस्त भारत के साथ चीन, जापान, अमेरिका , ब्रिटेन, नेपाल और बांग्लादेश ने दु :ख जाहिर किया। साथ ही पाकिस्तान के नये पीएम के तौर पर शपथ ग्रहण करने वाले पूर्व क्रिकेटर ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।

वाजपेयी जी के पार्थिव शरीर को दिल्ली के कृष्णा मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर रखा गया है। उनके घर पर परिवारों , रिश्तेदारों और नेताओं, और सभी  राजनैतिक दलों और बड़ी हस्तियों का जमावड़ा लगा हुआ है। हर कोई उनके अन्तिम दर्शन के ले व्याकुल हो रहे है।

आज शाम 4 बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ अटल जी का अन्तिम संस्कार किया जाएगा। इसके लिए आम जनता के लिए वाजपेयी जी के तिरंग में लिपटे पार्थिव शरीर को बीजेपी के मुख्यालय लाया गया है। अटली बिहारी वाजपेयी जी की अन्तिम यात्रा बीजेपी मुख्यालय से तकरीबन 1 बजे से शुरू की जाएगी। यह यात्रा पंडित दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग , दिल्ली गेट , नेताजी सुभाष मार्ग  और शान्ति वन होते हुए राष्ट्रीय समाधि स्थल ले जाया जाएगा। वहां अटल जी का पार्थिव शरीर को पंचतत्व में विलीन किया जाएगा। आज सभी दफ्तरों, सरकारी कार्यलयों ,स्कूलों ,कॉलेजों की छुट्टी कर दी गई है और वाजपेयी की अन्तिम यात्रा में कोई परेशानी ना आए इसलिए सभी दिल्ली के कुछ रास्तों को आम लोगों के लिए बन्द कर दिया गया है।

वाजपेयी जी के अन्तिम दर्शन करने और उनको श्रद्धाजंलि देने के लिए भूटान के जिग्मे खेसर नगग्येल वांगचुक, नेपाल के विदेश मंत्री पीके ग्यावल, श्री लंका के विदेश मंत्री लक्ष्मण किरिएला , बाग्लां के विदेश मंत्रई अबुल हसन महमूद अली और पडोसी देश पाकिस्तान के कानून मंत्री अली ज़फर भी मौजूद रहेंगे।

पीएम मोदी-

वाजपेयी जी के निधन पर शोक जताते हुए देश के पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा  कि स्वर और शब्द देने वाले हम सभी के प्रेरणा के स्त्रोत अटल बिहारी वाजपेयी जी नही रहें। पीएम मोदी ने आगे कहा कि  वाजपेयी के रूप में भारतवर्ष ने अपना अनमोल, अटल रत्न को खो दिया। पीएम मोदी ने आगे भी कहा, 'वाजपेयी के निधन से एक युग का अंत हो गया।  उनका निधन संपूर्ण राष्ट्र के लिए अपूर्णीय क्षति है। मेरे लिए तो वाजपेयी का जाना पिता तुल्य संरक्षण का साया सिर से उठने जैसा है। उन्होंने मुझे संगठन और शासन दोनों का महत्व समझाया। दोनों में काम करने की शक्ति और सहारा दिया। वो जब भी मिलते थे, तो पिता की तरह खुश होकर, आत्मीयता के साथ गले लगाते थे।

अमित शाह-

वाजपेयी के निधन पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रैस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के देहावसान के साथ ही अब भारतीय राजनीति के आकाश का ध्रुवतारा नहीं रहा। वो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे,उनके जाने के साथ ही देश ने एक अजातशत्रु राजनेता खोया है। और साहित्य ने एक कवि को खोया है. पत्रकारिता ने एक स्वभावगत पत्रकार को खोया है। देश की संसद ने गरीबों की आवाज को खोया है

शत्रुधन सिन्हा-

फिल्म अभिनेता और नेता शत्रुध्न सिन्हा ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया और कहा कि मैने एक तरह से एक पिता को खो दिया और उनके निधन से भारतीय राजनीति में एक युग का अन्त हो गया। साथ ही आगे कहा कि वाजपेयी जी के जाने से ऐसा लग रहा कि हम अनाथ हो गए।

सोनिया गांधी-

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अटल जी के निधन पर शोक व्यक्त किया। सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें वाजपेयी के निधन का गहरा दुख पहुंचा है, वास्तव में वाजपेयी जी लोकतांत्रिक मुल्यों को समझते थे। वे एक महान वक्ता थे।

अमिताभ बच्चन-

सदी के महानायक बॉलीवुड़ के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने भी अपने ब्लॉग के जरिए दुख जताया कहा कि  एक कवि, एक लेखक, एक प्रबुद्ध मन और दयालु शख्स इस दुनिया से चले गए। साथ ही उन्होने अपने ब्लॉग पर लिखा कि वे मेरे पिता और उनके कामों के प्रशंसक थे और ऐसे कई मौके थे जब उन दोनों ने मुलाकात की हो और उस वक्त मै भी मौजूद रहा।

मोहन भागवत-

श्री अटलजी का जाना हम सबके मन में खालीपन छोड़ गया है, जिसकी पूर्ति असंभव है। मोहन भागवत ने आगे कहा कि उनके जैसे व्यक्ति बार-बार नहीं मिलते है , ऐसे व्यक्ति युगों में , करोड़ो में एक होते है। अपने युग की छाप छोड़कर अटल जी ने अपना जन्म समाप्त किया । अटल जी नही रहे, अटल जी अमर है।

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