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व्यंग्य : जज साहब, चारा घोटाला तो 2जी घोटाले के सामने कुछ भी नहीं है !

व्यंग्य : जज साहब, चारा घोटाला तो 2जी घोटाले के सामने कुछ भी नहीं है !

पिछले कुछ दशकों में भारतीय राजनीती ने भ्रष्टाचार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किये हैं इस प्रकार से इस महान गणतंत्र को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 1 लाख 76 हज़ार करोड़ का 2G घोटाला, 70 हज़ार करोड़ का कामनवेल्थ खेल घोटाला, 1 लाख 85 हज़ार करोड़ का कोयला घोटाला, 80 हज़ार करोड़ का  हथियार सौदा घोटाला, 2500 करोड़ का शारदा ग्रुप चिट-फण्ड घोटाला जैसे न जाने कितने घोटाले हुए जिनमे हमारी मेहनत की कमाई से सरकार को भरे गए टैक्स के पैसों की चोरी की गई बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने वाले इन घोटालों ने विश्व भर में भारत की छवि ख़राब की। आपको हैरानी होगी की इन्ही घोटालों में से एक 2G घोटाले के आरोपी तत्कालीन मंत्री ए राजा और कनिमोझी को विशेष सीबीआई अदालत द्वारा बाइज़्ज़त बरी कर दिया गया है मानो हम सबकी जेब से 1 लाख 76 हज़ार करोड़ रूपये की चोरी तो हुई लेकिन चोरी किसने की ये पता ही नहीं। इतनी बड़ी राशि के घोटाले इस देश में होते हैं और बात आई-गई हो जाती है इसका मतलब हम कह सकते हैं की विकास तो हो रहा है। इन्ही घोटालों की देन है कि भारत को 'रिपब्लिक ऑफ़ स्कैम्स' की संज्ञा दी जाने लगी। 

बहरहाल आज हम चारा घोटाले पर चर्चा करते हैं जिसमे बीते शनिवार को राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल के क़ैद की सजा सुनाई गई है। चूँकि कई सालों तक यह घोटाला बड़ी ईमानदारी से अधिकारीयों और मंत्रियों की सांठ-गांठ से निरंतर चलता रहा , यह बता पाना कि असल में घोटाले की राशि क्या है बहुत मुश्किल है लेकिन फिर भी एक अनुमान के मुताबिक़ इस घोटाले में लगभग 950 करोड़ रूपये सरकारी खजाने से पशुओं के लिए चारा खरीदने के नाम पर फ़र्ज़ी बिल प्रस्तुत करके निकले गए। ईमानदारी से अगर विचार करें तो लालू का यह चारा घोटाला 2G घोटाला और कोयला घोटाला के सामने तो कुछ भी नहीं है। लालू मन ही मन जेल में अपने आप को इतनी काम राशि का घोटाला करने के लिए कोस रहे होंगे और उनके सामने ए राजा और कनिमोझी का चेहरा बार-बार सामने आता होगा और चिढ़ाते हुए कहता होगा कि 1 लाख 76 हज़ार करोड़ के घोटाले के बाद भी वे आज़ाद हैं। ए राजा और कनिमोझी से प्रेरित होकर लालू मन ही मन अपने आप को पुरस्कार पाने का हक़दार भी मानते होंगे । 

खैर, अब जब लालू को सजा हो ही चुकी है और यही मुद्दा 'टॉप ट्रेंडिंग' में है तो थोड़ा चारा घोटाले की तह में चलते हैं। यह असल में पशुपालन घोटाला है जिसमे पशुओं के लिए चारा, दवाएं और अन्य सामग्रियों की खरीददारी के लगभग 950 करोड़ के फ़र्ज़ी बिल पशुपालन विभाग द्वारा सरकारी खजानों से भुनाए गए। साल 1994 में बिहार पुलिस ने पटना, रांची और गुमला जैसे कई कोषागारों से करोड़ों की अवैध निकासी के मामले दर्ज किये और जांच शुरू की। रातों रात सैकड़ों सरकारी अधिकारी और ठेकेदार गिरफ्तार किये गए। विपक्ष की मांग पर मामला सीबीआई को सौपा गया।  बाद में सीबीआई ने बताया कि अभियुक्तों के संबंध राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यूनाइटेड) के बड़े नेताओं से थे। मुख्य लेखा परीक्षक दवरा शिकायत के बाद भी बिहार सरकार ने कोई कार्रवाही नहीं की। कई साल तक तो बजट ही पारित नहीं किया गया और राज्य लेखा अनुदान के भरोसे चलता रहा। सीबीआई के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री को न सिर्फ इसकी सूचना थी बल्कि कई बार उन्होंने अवैध धन निकासी की अनुमति भी दी थी। पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और कई मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया और लालू के खिलाफ  आरोप पत्र दाखिल किया गया जिसके बाद लालू को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा और वह कई महीनों तक जेल में रहे। इस घोटाले से सम्बंधित कई मामलों में लालू को सज़ा सुनाई जा चुकी है। लालू प्रसाद यादव भारत के इतिहास में पहले सांसद हैं जिन्हे 10 सालों के लिए अयोग्य ठहराया जा चूका है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लालू के साथ उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को भी अभियुक्त बनाया गया है। 

फोटो साभार : पंजाब केसरी

इसी दौरान बिहार और झारखण्ड राज्य का बंटवारा भी हुआ जिसके बाद लम्बे समय तक यह बहस चलती रही की मामले की सुनवाई पटना में हो या रांची में। बहुत सी बाधाओं और लम्बे इंतज़ार के बाद लगभग 17 साल बाद सीबीआई को सफलता मिली। चारा घोटाले में लालू के ऊपर 6 मामले चल रहे हैं  जिनमे से एक में उन्हें 5 साल और दुसरे में साढ़े तीन साल की सजा सुनाई जा चुकी है। 

भ्रष्टाचार की अंधी दौड़ में जब नेताओं ने नैतिकता बेच दी है और लोकतंत्र की क्रूरतापूर्ण हत्या करने पर आतुर हैं, इस देश की न्यायपालिका ही है जो इस देश के जिम्मेदार आम नागरिक के लिए तिनके का सहारा है। 

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