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2018 के 8 विधानसभा चुनावों का संक्षिप्त विश्लेषण

2018 के 8 विधानसभा चुनावों का संक्षिप्त विश्लेषण

राजनीतिक दृष्टिकोण से वर्ष 2018 बहुत महत्वपूर्ण है और 2017 की तरह ही राजनीतिक उठा-पटक इस वर्ष भी चुनाव विश्लेषकों और मीडिया के साथ-साथ आम जन मन को रोमांचित और प्रभावित करने वाली है| वर्ष 2018 में भारत में आठ राज्यों में चुनाव होने हैं जो 2019 के लोकसभा चुनावों पर गहरा असर डालेंगे| भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी के विजय रथ के लिए 2018 शायद अंतिम ‘ब्रेकर’ होगा जिसे पार करने के बाद वह 2019 में लोकसभा की ‘फिनिशिंग लाइन’ छू सकते हैं वहीँ निराशा के दौर से गुज़र रही कांग्रेस के लिए 2018 आशा का किरण पुंज साबित हो सकता है | 2014 में प्रधानमत्री मोदी द्वारा दिया गया ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा 2019 तक काफी हद तक सच साबित होता दिख रहा है | कभी पूरे देश पर शासन करने वाली कांग्रेस का आज पंजाब, मेघालय, मिजोरम, कर्नाटक और केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी पर ही शासन बचा रह गया है वहीँ भारतीय नक़्शे का भगवाकरण ऐसा अतीत में कभी नहीं देखा गया जिस स्तर पर आज है |

जिन आठ राज्यों में चुनाव होने हैं उनमे उत्तर पूर्वी राज्य त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड हैं |

इसमें हिंदी बेल्ट के मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ और दक्षिण का कर्नाटक राज्य शामिल है |

एक-एक करके इन राज्यों में 2018 में संभावित चुनावी उतार-चढ़ाव का संक्षिप्त विश्लेषण :

राजस्थान :

2013 के विधानसभा चुनाव में 200 सीटों में से 163 सीटें बीजेपी को वसुंधरा राजे के नेतृत्व में मिलीं थी और 2014 के लोकसभा चुनाव में तो सभी 25 सीटें बीजेपी के खाते में आई थीं | यहाँ कांग्रेस के लिए लड़ाई कठिन ही होगी क्योंकि यहाँ बीजेपी और कांग्रेस के वोट शेयर में बड़ा अंतर है | हालाँकि दिसम्बर 2017 में निकाय उपचुनावों में कांग्रेस की शानदार वापसी हुई है | कांग्रेस के लिए सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच चुनाव करना आसान नहीं होगा | अशोक गहलोत गुजरात चुनाव के प्रभारी बनाए गए थे और चुनाव परिणाम सकारात्मक आने के बाद वह पुरस्कार स्वरुप मुख्मंत्री की सीट अवश्य चाहेंगे | यहाँ साल के अंत में चुनाव होने हैं |

त्रिपुरा :

बीजेपी के लिए त्रिपुरा की गद्दी पर 25 सालों से काबिज़ सीपीएम के माणिक सरकार की सरकार को हराना एक चमत्कार ही होगा क्योकि बीजेपी का वोट शेयर 2013 में 2 प्रतिशत था और 2014 में 6 प्रतिशत | हालाँकि उत्तर-पूर्वी राज्यों में बीजेपी और संघ ने पूरी जान झोंक दी है |

नागालैंड :

नागा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) सत्ता में हैं जिसे बीजेपी का साथ मिला हुआ है और यदि यह साथ 2018 में भी बरक़रार रहा तो पहले से ही नेतृत्व विहीन कांग्रेस के लिए मुश्किल बढ़ जाएगी |

मेघालय :

यहाँ कांग्रेस की सरकार तो है लेकिन उप मुख्यमंत्री समेत 5 कांग्रेसी विधायकों का इस्तीफ़ा कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है | इस्तीफ़ा देने वाले सभी कांग्रेसी और अन्य 3 विधायकों ने नेशनल पीपल्स पार्टी में शामिल होने की घोषणा की है |

मिजोरम :

यहाँ कांग्रेस को उखाड़ फेंकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह कई यात्राएं कर चुके हैं और कांग्रेस पर विकास कार्यों में बाधा पहुँचाने का आरोप लगाते हुए बीजेपी के विकास कार्यों को वोट देने की अपील की है |

कर्नाटक :

दक्षिण का एकमात्र राज्य जहां बीजेपी सत्ता का सुख भोग चुकी है | पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा को अप्रैल-मई में होने वाले चुनाव का मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित किया जा चूका है | 2013 में 224 में से 122 सीटें कांग्रेस को और 40 सीटें बीजेपी को मिलीं थीं वहीँ 2014 के लोकसभा चुनाव में 28 में से 17 सीटें बीजेपी और और 9 सीटें कांग्रेस को मिली थीं जो बीजेपी के लिए संजीवनी से कम नहीं था | त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा की जनता दल (सेक्युलर) किंगमेकर साबित हो सकती है |

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