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संसद हमले के १६ वर्ष बाद संसद में क्या क्या बदला !

संसद हमले  के १६ वर्ष  बाद संसद में क्या क्या बदला !

13 दिसंबर 2001  संसद हमले को आज 16 वर्ष पूरे हो चुके है लेकिन आज भी हमारी यादो में संसद हमले की तस्वीरें ताजा है | 13 दिसंबर 2001 को भारत के लोकतंत्र के मंदिर को श्मशान बनाने की घिनौनी साजिश जिन आतंवादियो ने रची थी उन आतंकवादियों ने ये नहीं सोचा होगा की भारत के वीर योद्धा उन्हें उनके गंदे इरादों में कामयाब होने से रोकेंगे ही नहीं बल्कि उन्हें मिशाल बना देंगे की जो भी भारत की तरफ आँख उठा कर भी देखेगा उसका यही अंजाम होगा | संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी  संगठन  लश्कर और जैश ने मिल कर इस घटना को अंजाम दिया | इस आतंकी हमले में सुरक्षा दस्ते के 14 लोगो ने अपनी जान दे कर आतंक को मुहतोड़ जवाब दिया|

देश के लोकतंत्र के मंदिर में तात्कालिक प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी शीतकालीन सत्र की बहस में व्यस्त थे | देश के उपराष्ट्रपति माननीय श्री कृष्णकांत संसद से जाने को तैयार थे की तभी एक सफेद अम्बेस्डर कर तेज गति से गेट नंबर 12  की और बढ़ी सुरक्षाकर्मी आशंकित हो उठे और उस तरफ दौड़ पड़े | ड्यूटी पर तैनात जगदीश यादव आनन फानन में निहत्थे ही कर की और दौड़ पड़े और आतंकी गतिविधि को भांप कर संसद के सभी दरवाजे बंद करने के आदेश दिए और आतंकियों को उतरने की वार्निंग दी आतंकियों ने उन्हें गोली मारी और आगे बढ़ने लगे सुरक्षाकर्मी जगदीश ने व्ही डीएम तोड़ दिया | उस समय संसद में हथियार बंद सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं किये जाते थे | संसद के अंदर अफरातफरी मच गयी और सभी परिस्थिति समझने का प्रयास करने लगे | गोलियों की आवाज से संसद भवन गूँज उठा | सुररक्षाकर्मी मातबर सिंह ने अपनी जान पर खेल कर गेट नंबर 11  को बंद किया आतंकियों ने उन्हें भी अपनी गोलियों का निशाना बनाया इसके बावजूद उन्होंने अपने वाकी टॉकी से अलर्ट जारी कर सभी गेट सुरक्षित करवाए | तात्कालिक गृहमंत्री श्री आडवाणी  जी ने जवाबी कार्यवाही को अपनी देख रेख में सम्पन्न करवाया | देश भर में ये खबर आग की तरह फ़ैल गयी | सभी चिंतित हो उठे की देश के नेता सुरक्षित है या नहीं | सुरक्षा बल की टुकडिया भारी संख्या में संसद में पहुंच चुकी थी और आतंकियों का बचना मुश्किल हो गया था ऐसा आभास होते ही एक आतंकी ने खुद को उड़ा लिया | जल्दी ही सुरक्षाबल के जवानो ने संसद में फैले खौफ और डर का अंत किया और 14 लोगो की  कुर्बानी के बाद सभी नेताओ को सुरक्षित बचा लिया गया |

भारतीय संसद पर हमले में चार लोगो को गिरफ्तार किया गया | अफजल , शौकत हुसैन , अब्दुल रहमान  गिलानी और अफ़सा गुरु को दिल्ली की पोटा अदालत ने दोषी करार दिया | सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल रहमान गिलानी और अफ़सा गुरु को बड़ी कर दिया | शौकत हुसैन को 10 वर्ष और अफजल गुरु को फांसी की सजा हुई | 9 फरवरी 2013 को अफजल को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गयी |

आज संसद में हथियार बंद कमांडो तैनात किये जाते है | कैमरे से सेक्युरिटी के पुखरा इंतजाम है | तात्कालिक प्रधानमंत्री श्री अटल जी ने इस हमले के बाद संसद की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए एक अलग आधुनिक हथियारों से लैस टीम संसद की सुरक्षा के लिए नियुक्त की और सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता किया | संसद में हर समय हथियार बंद सुरक्षाकर्मी सुरक्षा में तैनात रहते है | इसके आलावा ऐसी परिस्थियों से निपटने के लिए की कमांडो टीम भी बनाई गयी जो मात्र कुछ ही समय में आतंकियों को समाप्त करने में सक्षम है | इनके पास सबसे आधुनिक हथियार होते है | इन्हे हर परिस्थिति में रहना और लड़ना सिखाया  जाता है ये हमारे देश का गर्व है |

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