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और अचानक ही हमें छोड़ गयीं स्मिता..

और अचानक ही हमें छोड़ गयीं स्मिता..

संवेदनशील कलाकारों में गिने जाने वाली अभिनेत्री स्मिता पाटिल ने 13 दिसंबर 1986 को 31 साल की उम्र में अंतिम सांसे ली थीं। यदि आज वो जिंदा होतीं तो हम उनका 62वां ज़न्मदीन मना चुके होते।  सिनेमा जगत के आकाश में स्मिता वो चमकता सितारा थीं जो बहुत ही कम समय में विलुप्त हो गयीं। 

17 अक्टूबर 1955 को अद्भुत अभिनय क्षमता की मालकिन स्मिता का जन्म पुणे शहर में हुआ था। पिता शिव जी राव पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री थे और माता विद्या ताई सामजिक कार्यकर्ता थी।  मराठी माध्यम के स्कूल से इन्होने प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। टीवी समाचार वाचक के रूप में उनका कैमरे से पहली बार सामना हुआ। इनके जन्म के समय इनकी मुस्कराहट को देखकर इनकी माँ ने इनका नाम स्मिता रखा अर्थात 'मुस्कान' । स्मिता पाटिल असल ज़िन्दगी में बहुत ही शरारती थी और गाड़ी चलाने का इन्हें बहुत शौक था।  इसी वजह से चोरी से 14  साल की उम्र में ही ड्राइविंग सीख लिया। 

लेखिका मैथिलि राव ने स्मिता की जीवनी में लिखा कि स्मिता पाटिल की माँ स्मिता और राज बब्बर के रिश्ते से नाखुश थी।  महिलओं के अधिकार के लिए लड़ने वाली स्मिता किसी का घर कैसी उजाड़ सकती थी . राज बब्बर से बढ़ते नजदीकियों के कारन इनकी काफी आलोचना हुई क्योंकि राज बब्बर की शादी नादिरा से हो चुकी थी।  जहाँ लोगों को नादिरा से काफी सहानुभूति थी वहीं स्मिता को बहुत भला बुरा कहा जा रहा था। अंततः राज बब्बर से इन्होने शादी भी की। 

 फिल्मों में आने से पहले स्मिता बॉम्बे दूरदर्शन में मराठी में समाचार पढ़ा करती थी  जिसमे साडी पहनना जरूरी होता था जबकि स्मिता को जीन्स पसंद थी। न्यूज़ पढने से पहले वो जीन्स पर ही साड़ी पहन लिया करती थी। सिनेमा जगत में “चरण दास चोर” नाम की फिल्म से स्मिता का पदार्पण हुआ।  1977 में इनकी “भूमिका” फिल्म आई जिसके लिए इन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 1981 में फिल्म “चक्र” आई जिसके लिए उन्हें फिर से नेशनल अवार्ड मिला।  फिल्म मिर्च मसाला में सोन बाई के किरदार को इन्होने बखूबी निभाया जिसकी काफी तारीफ हुई और यह फिल्म उनके निधन के बाद रिलीज़ हुई।  अपने किरदारों में खो जाना उनकी सबसे बड़ी खासियत थी | हिंदी और मराठी अभिनेत्री स्मिता पाटिल को पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है | स्मिता पाटिल ने भूमिका, बाज़ार, आज की आवाज़, अर्थ, मंडी, शक्ति जैसी तमाम फिल्मो में बेहतरीन अभिनय किया। 




स्मिता पाटिल ने एक बच्चे को भी ज़न्म दिया और उसका नाम प्रतीक रखा। लेकिन दुर्भाग्यवश बेटे प्रतीक के जन्म के दो सप्ताह बाद ही स्मिता पाटिल ने इस दुनिया को हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया, हालांकि उनका अचानक इस दुनिया को छोड़कर जाना आज भी रहस्य बना हुआ है। लेखिका मैथिलि के अनुसार, स्मिता पाटिल को वायरल इन्फेक्शन के कारण ब्रेन इन्फेक्शन हो गया था। हालत खराब होने के बावजूद वो अपने बेटे को छोड़कर हॉस्पिटल नहीं जाना चाहती थी। लेकिन स्थिति नाजुक हो जाने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।  धीरे धीरे उनके शरीर का एक एक अंग ज़वाब देता गया।  कहा जाता है कि उस समय राज बब्बर के साथ भी उनका रिश्ता कुछ खाश नहीं रह गया था जिसकी वजह से स्मिता खुद को बहुत ही अकेला महसूस करने लगी थी और इसी दौरान उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।  उनकी बहन अमेरिका में रहती थी और उनको आने में वक़्त लगता इसलिए उनके शव को तीन दिनों तक बर्फ पर रखा गया।  बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन के मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत ने मरने के बाद स्मिता का मेकअप किया था। स्मिता के मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत के मुताबिक  स्मिता कहा करती थी कि "दीपक, जब मैं मर जाउंगी तो मुझे सुहागन की तरह तैयार करना “ .  स्मिता की अंतिम इच्छा के मुताबिक ही उनके शव का सुहागन की तरह मेकअप किया गया |

मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत ने बीबीसी से कहा  “ यह इत्तेफाक ही था, मैं उस दिन को नहीं भूल पाता की जब राजकुमार को लेटकर मेकअप करता देख स्मिता पाटिल कहने लगी कि दीपक मेरा भी मेकअप इसी तरह करो।  मैंने कहा ऐसा लगेगा कि मुर्दे का मेकअप कर रहा हूँ, मुझसे नहीं होगा और यह दुर्भाग्य की बात है कि इत्तेफाक ही था कि मैंने उनका ऐसे ही मेकअप किया और मेरी समझ से इस तरह का मेकअप दुनिया में किसी आर्टिस्ट ने किसी भी कलाकार का नहीं किया होगा"

अपने सशक्त अभिनय से मात्र दस साल के करियर में सम्मानित स्थान हासिल करने वाली अपनी खूबसूरत मुस्कान वाली  इस खूबसूरत सांवली-सलोनी अभिनेत्री को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 

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