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घूर्णन कम होने से अगले वर्ष विनाशकारी भूकंप की आशंका : फोर्ब्स रिपोर्ट

घूर्णन कम होने से अगले वर्ष विनाशकारी भूकंप की आशंका : फोर्ब्स रिपोर्ट

किसी भी त्रिआयामी (3D) वस्तु को अपने स्थान पर स्थिर रहते हुए लट्टू की तरह एक काल्पनिक रेखा के इर्द-गिर्द घूमने को भौतिकी में घूर्णन कहते हैं। काल्पनिक रेखा को अक्ष (एक्सिस) कहते हैं और पृथ्वी भी घूर्णन करती है। दो वैज्ञानिक जो पृथ्वी के घूर्णन और भूकंप पर अध्ययन कर रहे हैं उन्होंने यह दावा किया है की अगले वर्ष विश्व भर में विनाशकारी भूकंप के झटके देखे जा सकते हैं।प्रसिद्द पत्रिका फ़ोर्ब्स में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने की गति में रहस्यमय ढंग से कमी आई है और वैज्ञानिकों ने इस तथ्य को ही अपनी भविष्यवाणी का मुख्य आधार बनाया है। हालाँकि भूकंप की भविष्यवाणी आज की ताऱीख में भी वैज्ञानिकों द्वारा संभव नहीं है और इस रिपोर्ट में भी पिछले सौ से ज्यादा सालों के आंकड़ों का ही सहारा लिया गया है। 

अमेरिका के कोलोराडो विश्वविद्यालय के रोजर बिल्हेम और मोंटाना विश्वविद्यालय की रेबेका बेंडिक ने अमेरिका की जियोलॉजिकल सोसाइटी की वार्षिक बैठक के दौरान अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया जिसमे उन्होंने बताया है कि पृथ्वी की घूर्णन की गति में कुछ मिलीसेकंड की कमी आई है और इस कारणवश पृथ्वी के गर्भ में दबी हुई भारी मात्रा में ऊर्जा निकलने की सम्भावना है जिससे सतह पर हलचल मच सकती है और यह विनाशकारी भूकंप का रूप ले सकती है। भूवैज्ञानिकों ने वर्ष 1900 के बाद दुनिया भर में आए सभी भूकम्पों का अध्ययन किया जिनकी रिक्टर पैमाने पर तीव्रता सात से ज्यादा थी और पाया कि लगभग हर 32 साल के बाद भूकंप की संख्या में वृद्धि होती है। उन्होंने इस तथ्य का तुलनात्मक अध्ययन पृथ्वी के घूर्णन गति में होने वाली कमी से किया। उन्होंने पाया की ऐतिहासिक रूप से हर 25 से 30 साल में पृथ्वी की घूर्णन की गति में कमी होने का दौर शुरू हो जाता है और यह भूकंप के ठीक पहले होता है। महत्वपूर्ण बात यह है की 2013 से घूर्णन की गति में कमी होने का दौर शुरू हो चूका है और 2017 चौथा साल है। यदि औसत 5 साल हो तो 2018 पांचवा साल होगा और इसी आधार पर यह भविष्यवाणी की गई है। 


फोटो : विकिपीडिया

अब चूँकि घूर्णन और भूकंप का कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है,उन्होंने अपने तर्क को सही साबित करने के लिए कई परिकल्पनाओं का सहारा लिया है और बताया है कि 2018 असामान्य रूप से भूकंप के लिए सबसे अधिक सक्रिय साल होगा। एक परिकल्पना के अनुसार द्रव धातु (लिक्विड मेटल) से भरी परत बाहरी कोर जो कि ठोस निचले आवरण (सॉलिड लोअर मेंटल) के नीचे फैली होती है कई बार (सॉलिड लोअर मेंटल के सतह में चिपक या अटक जाती है जिससे इसके प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है और इस कारणवश पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र परिवर्तित हो जाता है और पृथ्वी के घूर्णन की गति पर प्रभाव पड़ता है। 

यह आंकड़े तथ्यों का सहसंबंध तो दर्शाते हैं लेकिन कोई ठोस कारण नहीं बताते।

इसलिए वैज्ञानिक अभी भी अनिश्चित हैं और यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या घूर्णन की गति में कमी भूकंप का कारण बन सकती है या यह परिकल्पना या संयोग मात्र है। घूर्णन गति धीमे होने के पांचवे साल में औसतन 25 से 30 भूकंप आते है जिनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर सात से अधिक होती है और इस साल केवल 6 बड़े भूकंप आए हैं तो यह कहा जा सकता है कि अगले साल यह संख्या 20 के पार जा सकती है।

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