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किस प्रकार तोड़ा ज्वालामुखी देवी ने अकबर का अभिमान !

किस प्रकार तोड़ा ज्वालामुखी देवी ने अकबर का अभिमान !

हिमाचल में काँगड़ा अपने मंदिर काँगड़ा देवी के नाम से विख्यात है । काँगड़ा से लगभग ३० किलोमीटर दूरी पर स्थित है ज्वालामुखी देवी मंदिर। ज्वालामुखी देवी मंदिर में किसी देवी की पूजा नहीं होती बल्कि यहाँ नौ ज्वालाएँ धरती के गर्भ में प्रकट होती है उनकी पूजा की जाती है ।

ज्वालामुखी मंदिर का निर्माण राजा मुनि चंद ने करवाया था, इस मंदिर की गणना प्रमुख शक्ति पीठो में की जाती है, वैसे तो इस मंदिर में बहुत चमत्कार होते है लेकिन यह मंदिर अकबर के गुरुर को तोड़ने के लिए प्रचलित है ।

ऐसी कथा प्रचलित है की माता का एक भक्त ध्यानु एक हजार भक्तो के साथ माता के दर्शन के लिए आ रहा था, इतने लोगो का काफिला देखकर अकबर के सेनिको के उन्हें रोककर अकबर के सामने पेश किया ।

ध्यानु ने अकबर को माता की महिमा बताई जो अकबर को सहन नहीं हुई। अकबर ने भक्त के घोड़े का सिर घोड़े के अलग करते हुए कहा की यदि तुम्हारी देवी में शक्ति है तो वह घोड़े को जीवित कर देगी । ध्यानु घोड़े के सिर और धड़ को लेकर माता के दरबार पंहुचा और माता का ध्यान किया। माता ने ध्यानु की भक्ति से प्रसन्न होकर उसके घोड़े को जीवित कर दिया। जब अकबर को इस चमत्कार का पता चला तो वह बहुत प्रभावित हुआ और माता के दर्शन के लिए आया तथा माता की परीक्षा के लिए मंदिर में पानी डलवाया फिर भी ज्योति नहीं बुझी । अकबर ने माता को पचास किलो का छत्र चढ़ाया लेकिन माता ने वह स्वीकार नहीं किया और वह छत्र गिर गया । इस तरह माता ने अकबर का घमंड दूर किया|

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