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आखिर क्यों खिलजी ने आग लगवा दी नालंदा यूनिवर्सिटी में?

आखिर क्यों खिलजी ने आग लगवा दी नालंदा यूनिवर्सिटी में?

नालंदा यूनिवर्सिटी वर्ल्ड की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी थी, जहां रहने के लिए हॉस्टल था और इस यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स विदेश से भी पड़ने आते थे । छठी शताब्दी में हिंदुस्तान पर तुर्की शासक इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी का राज था । जानते है आखिर क्यों इस शासक ने आग लगवा दी नालंदा यूनिवर्सिटी में -

एक बार खिलजी बहुत बीमार पड़ गया और उसने अपने तुर्की हकीमो से बहुत इलाज करवाया लेकिन खिलजी की तबियत में कोई सुधार नहीं आया, तब सबने खिलजी को नालंदा यूनिवर्सिटी के प्रधान राहुल श्रीभद्र से ट्रीटमेंट करवाने को कहा पर खिलजी ने उन्हें साफ़ मना कर दिया क्योकि खिलजी में बहुत घमंड था और उसे लगता था की कोई भी हिंदुस्तान का वैद्य तुर्की वैद्य से ज़्यादा काबिल नहीं हो सकता

लेकिन जब बहुत वक़्त तक खिलजी की हालत में सुधार नहीं हुआ तब खिलजी वैद्य राहुल श्रीभद्र से इलाज करवाने के लिए राजी हुआ पर खिलजी ने उनके सामने एक शर्त रखी की वो किसी भी हिंदुस्तानी जड़ीबूटी का इस्तेमाल नहीं करेंगे, खिलजी की इस शर्त को राहुल श्रीभद्र ने स्वीकार किया और उन्होंने खिलजी को कुरान दी और उसे रोजाना पड़ने को कहा ।

राहुल श्रीभद्र ने उस कुरान के पन्नों पर दवा लगा दी थी जिससे खिलजी बहुत जल्द ठीक हो गया । तब यह सोचकर खिलजी जलने लगा की हिंदुस्तानी वैद्य तुर्की वैद्य से ज़्यादा काबिल कैसे हो सकते है और इसी जलन में खिलजी ने नालंदा यूनिवर्सिटी में आग लगवा दी और वहा के बौद्ध भिक्षुओं और टीचर्स को भी मरवा दिया ।

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