Bollywood Fashion Sports India Beauty Food Health Global Travel Today Tales Facts Others Education & Jobs Cricket World Cup 2019 Scinece & Tech

चे ग्वेरा : एक निर्भीक क्रांतिदूत जो अमर है

चे ग्वेरा : एक निर्भीक क्रांतिदूत जो अमर है

दमनकारी नीतियों और शासकों के विरुद्ध विश्व में जब भी कहीं क्रांति होती है तो प्रायः लगभग हर प्रदर्शन में,हर आंदोलन में युवा से लेकर वृद्ध तक एक टी-शर्ट में देखे जा सकते हैं जिसपर एक सितारों वाली टोपी पहने एक दाढ़ी वाले युवा की तस्वीर छपी होती है , वह तस्वीर होती है चे ग्वेरा की। एक महान व्यक्तित्व जिसने समस्त विश्व में पूंजीवादी शक्तियों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी और सिर्फ एक नहीं बल्कि कई देशों की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और क्रांति के प्रतीक बने। जिस व्यक्ति को अमेरिका और पूंजीवादी शक्तियां जड़ से उखाड़ फेंकना चाहती थी वह व्यक्ति आज अपने विचारों के कारण करोड़ों लोगों के ह्रदय में अमर है।

क्यूबा की क्रांति में मुख्य भूमिका निभाने वाले चे ग्वेरा अर्जेंटीना के मार्क्सवादी क्रन्तिकारी थे जिनका जन्म 14 जून 1928 को अर्जेंटीना के रोज़ारिओ में एक मध्यम वर्ग परिवार में हुआ था। एल चे या सिर्फ चे के नाम से भी पुकारे जाने वाले अर्नेस्तो चे ग्वेरा एक चिकित्सक,कूटनीतिज्ञ,लेखक और गुरिल्ला नेता थे जिन्होंने दक्षिण अमेरिका के कई देशों में क्रांति लाकर उन्हें नवउपनिवेशवाद, साम्रज्यवाद और पूंजीवाद से स्वतंत्र कराने का बीड़ा उठाया। ब्यूनस आयर्स में चिकित्सा की पढाई के दौरान न जाने क्या सूझा कि चे अपने मित्र के साथ दक्षिण अमेरिका की यात्रा पर निकल गए। बस यहीं से उनके जीवन में सब कुछ बदल गया और अर्नेस्टो ग्वेरा से चे के रूप में परिवर्तित एक क्रांतिदूत विश्व में क्रांति का प्रतीक बन गया। दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में व्याप्त ग़रीबी और भूखमरी ने चे को झंकझोर कर रख दिया और चे ने इसके लिए अमेरिका के नवउपनिवेशवाद, साम्रज्यवाद और पूंजीवाद को जिम्मेदार माना और उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का सिर्फ एक ही हल है - सशस्त्र विश्व क्रांति।

चे ने अपनी यात्रा के दौरान जो कुछ भी देखा वो उनकी सोच बदलने और उन्हें एक क्रन्तिकारी के रूप में परिवर्तित करने के लिए पर्याप्त था। इस विषय पर वर्ष 2004 में एक फिल्म भी बनी थी 'दी मोटरसाइकिल डायरीज'.उनका झुकाव मार्क्सवाद की तरफ हो गया और उन्होंने सशस्त्र आन्दोलनों को ही इन समस्याओं का हल माना। जिस तरह हम भाई,ब्रो,दादा या ड्यूड बोलते हैं उसी तरह क्यूबा में चे बोलते हैं। कास्त्रो से जुड़ने के बाद सभी साथियों द्वारा उन्हें चे ही बुलाया जाने लगा।   

चे  गुआटेमाला के राष्ट्रपति याकोबो आरबेंज़ के समाज सुधार के आंदोलन का हिस्सा बने और अपने उद्देश्य में सफल भी हुए। इसके कुछ ही समय बाद 27 वर्ष की आयु में मेक्सिको सिटी में राउल और फिदेल कास्त्रो से चे की मुलाक़ात हुई और जल्द ही चे क्यूबा की महान '26 जुलाई क्रांति' में शामिल हो गए और क्रांति के उद्देश्य की प्राप्ति तक वह क्रांति एक प्रसिद्द चेहरा बन चुके थे।क्यूबा की क्रांति के बाद नव निर्वाचित सरकार में चे ने कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए क्यूबा के समाजवाद का विश्व भर में प्रचार किया और तृतीय विश्व के देशों से संबंध बनाने की जिम्मेदारी भी इनके ही ऊपर थी और इसी कारण चे 30 जून, 1959 को भारत भी आए थे। 

गुरिल्ला युद्ध की नियम पुस्तक और बोलीविया डायरीज और अन्य कई किताबें लिखने वाले चे ग्वेरा 1965 में कांगो पहुंचे जहां उन्होंने क्रांति लाने का प्रयास किया और फिर बोलीविया पहुंचे जहां विद्रोह की चिंगारी को मशाल में बदलने का कार्य चे ने किया। अमेरिका की खुफ़िआ संस्थाएं उन्हें ढूंढ रही थी और चे ग्वेरा आम लोगों में क्रांति की चिंगारी पैदा करने में व्यस्त थे। अंततः सेना की सहायता से खुफिया संस्थाओं ने चे को मार कर 9 अक्टूबर 1967 को अमर कर दिया। चे ग्वेरा को टाइम मैगज़ीन ने सदी के सबसे प्रभावशाली 100 व्यक्तियों में से एक माना और उनकीस तस्वीर "गेरिलेरो एरोइको(वीर गुरिल्ला)" को विश्व की सबसे प्रसिद्द तस्वीर मानी जाती है। हाल ही में 9 अक्टूबर को समस्त विश्व में उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

Comments

Trending