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कांचा इलैया एक भारतीय शिक्षाविद, लेखक,राजनीतिक विचारक और दलित अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता हैं जो अंग्रेजी और तेलुगु दोनों भाषाओँ में लिखते हैं। 5 अक्टूबर 1952 को वर्तमान के तेलंगाना राज्य के वारंगल जनपद के एक छोटे से गाँव में जन्मे कांचा इलैया अपनी लिखी हुई किताबों और उनमे व्यक्त किये गए विचारों के कारण आजकल चर्चा में हैं।

कांचा इलैया ने कई किताबें लिखीं जिनमे से मैं हिन्दू क्यों नहीं हूँ , हिन्दू  धर्म पश्चात भारत: दलित-बहुजन में एक चर्चा; सामाजिक-आध्यात्मिक और वैज्ञानिक क्रांति, भैंस राष्ट्रवाद :आध्यात्मिक फ़ासीवाद की आलोचना और भगवान एक राजनीतिक दार्शनिक के रूप में : ब्राह्मणवाद को बुद्ध की चुनौती प्रमुख हैं। 
हालाँकि कांचा इलैया के साथ विवादों का पुराना नाता रहा है लेकिन इस बार वह अपनी 2009 में लिखी किताब "हिन्दू धर्म पश्चात भारत: दलित-बहुजन में एक चर्चा; सामाजिक-आध्यात्मिक और वैज्ञानिक क्रांति" के कारण विवादों में हैं और इस किताब के तीखे विरोध के साथ उन्हें जान से मार दिए जाने की भी धमकी मिली है। 

अपनी कई किताबों में भारत की जातिवादी व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करने वाले इलैया ने इस बार अपनी किताब " पोस्ट हिन्दू इंडिया" में तमाम जातियों पर लिखे गए लेखों का संग्रह छापा जिसमे आर्य-वैश्य समुदाय के ऊपर लिखा भी एक लेख है।हाल ही में इस किताब का तेलुगु अनुवाद हुआ। आर्य-वैश्य समुदाय कहते हैं बनिया समुदाय को जिन्हे इस किताब में सामाजिक तश्कर या सोशल स्मगलर कहा गया है। इलैया को इस समुदाय का कड़ा विरोध झेलना पड़ा और कई बार उनपर हमला हुआ और जान से मारने की धमकी भी मिली। 
बीते 18 सितम्बर को तेलुगु देशम पार्टी के राज्यसभा सांसद टीजी वेंकटेश ने कांचा इलैया को देशद्रोही करार दे दिया और कहा कि इलैया की किताबें समाज को बांटने वाली हैं और खाड़ी देशों की तरह कांचा इलैया भी सड़क पर सरेआम फांसी दिए जाने लायक हैं। सांसद का कहना था की यदि किताब पर रोक नहीं लगाई गई तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। टीजी वेंकटेश आर्य वैश्य समुदाय से सम्बन्ध रखने वाले एक बड़े नेता हैं और किताब में दावा किया गया है की आर्य-वैश्य समुदाय के लोग मांसाहारी किसान थे जो बाद में शाकाहारी हो गए। बनिया समुदाय के ही एक आयोजन में उन्होंने देशभर में रह रहे अपने समुदाय के लोगों से कांचा इलैया के खिलाफ केस दर्ज करने की अपील भी की। 
तेलुगु देशम पार्टी की ही नेता और अभिनेत्री कविता ने कहा की इलैया गुरमीत राम रहीम से ज्यादा खतरनाक हैं वहीँ तेलंगाना के ही एक विधायक गणेश बिगाला ने प्रोफेसर इलैया को विदेशी एजेंट तक कह दिया। 
प्रोफेसर इलैया उनपर हो रहे हमलों पर 'द हिन्दू' से उन्होंने कहा : " भीड़ हाथ में चप्पल और पत्थर लेकर मेरे कार पर हमला करती है और ऐसी भीड़ अब हर जगह फैला दी गई है , कोई मुझे मेरी जुबान काटने की धमकी दे रहा है। इस समुदाय के लोग तैनात हैं,बच्चे मेर

कहते हैं की महात्मा गाँधी के समुदाय से आते हैं लेकिन गाँधी और अम्बेडकर में तो बड़े ही लोकतान्त्रिक सम्बन्ध थे और बाबासाहेब के  ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ लिखने पर गाँधी जी ने कहा था की ऐसी परिस्थिति में तो आप और भी कड़वा लिख सकते थे। उन्होंने कहा,"क्या इतने शक्तिशाली आर्य-वैश्य समुदाय में कोई ऐसा अर्थशास्त्री और विचारक नहीं है जो उनकी किताब पर उनसे तर्क कर सके और खंडन कर सके ?"

डेक्कन क्रॉनिकल से बातचीत में अपनी किताब पर उन्होंने कहा,"किताब ऐतिहासिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से लिखी गई है और किताब में प्रयोग हुए स्मगलर शब्द का अर्थ सामान की तस्करी  नहीं है बल्कि यह एक मुहावरा है जो कि आर्थिक प्रक्रिया के शोषण के लिए प्रयोग किया गया है। उनका इस सन्दर्भ में कहना है की व्यापार से आप कमाते तो हैं लेकिन समाज में इसका बिलकुल भी निवेश नहीं करते हुए। 

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