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करवाचौथ : सौभाग्य और प्यार का त्यौहार

करवाचौथ : सौभाग्य और प्यार का त्यौहार

भारत में त्यौहारों की कोई कमी नहीं एक जाता है तो दूसरा दरवाजे पर खड़े होकर दस्तक दे रहा होता है | अभी अभी हमने शरद पूर्णिमा मनाई है और करवाचौथ सामने खड़ी है  फिर दिवाली का उजाला हमारा घर रौशन करने के लिए खड़ा है | भारत को त्यौहारों का देश ही कहा जाता है |

करवा चौथ हर सौभाग्यवती स्त्री के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है | करवा चौथ कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है | इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियाँ निर्जल व्रत रहती है और रात्रि में पूजन कर चंद्र दर्शन के पश्चात ही अपना उपवास तोड़ती है | भारत के कई राज्यों में यह त्यौहार व्यापक स्तर पर मनाया जाता है | इस दिन सौभाग्यशाली स्त्रियाँ लाल रंग के सुंदर वस्त्र धारण करती है और श्रृंगार करती है इस दिन स्त्रियाँ सोलह श्रृंगार करती है और घर की या आस पास की सभी स्त्रियाँ एक साथ मिल कर एक ही स्थान पर पूजन करती है और कथा करती है अंत में चन्द्रमा को अर्ध्य दे कर स्त्रियाँ यह व्रत तोड़ती है | हर समुदाय में इस व्रत में अपनी अपनी प्रथा के अनुसार भोग लगाय जाता है कुछ समुदाय पूड़ी और खीर, फल ,तथा मिठाई का भोग लगाते है |

इस दिन जो कथा कही जाती है वह वीरावती नामक एक स्त्री की है | वीरावती सात  भाइयो की इकलौती बहन थी इस कारण सभी भाई उसे बहुत प्यार करते थे | जब उसका विवाह हुआ तो उसने पहली बार करवाचौथ  का व्रत रखा | भूख और प्यास के कारण वह बेहोश हो गयी इससे व्याकुल हो कर उसके भाइयो ने एक पेड़ पर चढ़ कर चलनी और दिए से नकली चाँद बनाया और अपनी बहन से पूजन करने को कहा बहन ने भाइयो पर विश्वास कर के चन्द्रमा को अर्घ दे कर भोजन कर ने  बैठ गयी लेकिन क्युकी उसने बिना चन्द्रमा निकले ही पूजन कर लिया था इस कारण उसके ससुराल से यह खबर आ गयी की उसका पति मूर्छित हो गया है वह अपने ससुराल जा कर अपने पति का सर गोद में रख कर रोने लगी | क्योकि उसने व्रत रखा था इसलिए भगवान गणेश ने आकर उससे कहा की यदि तुम करवा चौथ का व्रत हर वर्ष पूर्ण करोगी तो तुम्हारे पति को जीवन दान मिल जाएगा वीरावती ने पूरी निष्ठां से पुनः  करवा चौथ का व्रत किया और भगवान गणेश ने प्रसन्न हो कर उसके पति को जीवन दान दिया |

तभी से सभी  स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी आयु के लिए इस व्रत को करने लगी | कुछ समुदाय में करवाचौथ के दिन सुबह जल्दी उठ कर सरगी खाने की भी प्रथा है | सरगी में स्त्रियाँ मठरी , किशमिश,  मिठाई , ड्राई फ्रूट्स और अन्य चीजे भी खाती है और व्रत प्रारम्भ करती है | उपवास पूर्ण होने पर अनेक प्रकार के स्वादिष्ट पकवान बनते है और खाये जाते है |

इस बार करवाचौथ के पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6 .15 से 7 .30 बजे  तक  है | और चंद्र दर्शन का समय लगभग 8 बजकर 40 मिनट का है |

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