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शायद ये किसी को बताने की जरूरत नहीं की हमारे देश में स्वास्थ्य विभाग का क्या हाल है | भारत में विभिन्न रोगो से मरने वालो की संख्या प्रतिवर्ष हजारो के आकड़ो को भी पार कर रही है भारत में हर मौसम में अलग अलग रोग उत्पन्न हो जाते है और लगभग 25 % लोगो की मृत्यु सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योकि उन्हें धन के आभाव में उचित उपचार नहीं मिल पाता |

इसका एक बड़ा उदाहरण गोरखपुर अस्पताल में हुई मौते है जो सिर्फ इसलिए हुई क्योकि आक्सीजन सप्लाई कम्पनी का कुछ पैसा बकाया था और कम्पनी ने आक्सीजन सप्लाई रोक दी | इससे भारत की व्यवस्था की पोल खुले ना खुले लेकिन एक बात साबित हो जाती है की जीवन पैसो से कितना सस्ता है | जीवन का क्या है वो तो भेड़ बकरी की तरह पैदा ही हो रहे है धन कमाने का मौका फिर मिले ना मिले |

सवाल ये है की कम्पनियो को सरकार पर इतना भी भरोसा नहीं की वो उनका पैसा वापस करेगी | क्या ऐसी कम्पनिया अस्पतालों में ठेके लेने के काबिल है अगर नहीं तो उनकी मान्यता कब रद्द होगी | एक न्यूज चैनल ने बड़ा खुलासा करते हुए इस बात का पता लगाया है की सरकारी अस्पतालों में किस तरह से भ्र्ष्टाचार ने अपनी जड़े फैला रखी है | cmo बिना कमीशन लिए डॉक्टरों की सैलरी तक नहीं देते | पैसा देकर  सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते है , निजी हॉस्पिटल चलाते है | और सरकार से गरीबो के इलाज के नाम पर करोड़ो लूटते है इतने से भी उनका पेट नहीं भरता जिन गरीबो के नाम पर कमाते है उन्हें दवाइया बाहर से लाने पर मजबूर करते है जबकि सरकार पहले ही एक एक पैसा उनके इलाज और दवाई का दे चुकी होती है | सारा पैसा इन  बेईमानो की जेब में जाता है और गरीब दवा और इलाज के बिना ही दम तोड़ देता है | इतनी साड़ी घोषणाओं के बावजूद गरीब माँ अपने बच्चे को सड़क पर जन्म देती है उसे बेड ना होने का बहाना बना कर हॉस्पिटल से बाहर फेंक दिया जाता है | गर्भवती स्त्री की सहायता तो लोग इंसानियत के नाते यूही कर देते है | अरे हम तो भूल ही गए जो पैसो के लिए मासूम बच्चो की जान ले सकते है उन में इंसानियत कहा होगी |

हमेशा सरकार को दोष देने से ही हमारे कर्तव्य पूरे नहीं होंगे जरिये ढूंढ कर हमे भी इस भ्र्ष्टाचार के खिलाफ लड़ना होगा | कम से कम हम ऐसे डॉक्टर के प्राइवेट अस्पतालों का बहिष्कार तो कर ही सकते है जो सरकारी तनख्वाह लेते हुए निजी हॉस्पिटल चलाते है |

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